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डालमिया भारत शुगर को 700 करोड़ टर्नओवर की उम्मीद

सीतापुर/आशुतोष ओझा

Updated Wed, 28 Nov 2012 09:14 PM IST
dalmia bharat sugar expects turnover to 700 crore
पिछले कुछेक सालों से नुकसान उठा रही डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को भरोसा है कि आने वाले दिनों में नीतिगत बदलाव और बाजार के फेवरेवल होने से हालत में सुधार आएगा। कंपनी को चालू वित्तवर्ष में करीब 700 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करने की उम्मीद है।
डालमिया भारत शुगर के डिप्टी कार्यकारी निदेशक नरेश पालीवाल ने अमर उजाला को बताया कि पिछले 3-4 सालों से हम लगातार नुकसान उठा रहे हैं। पिछले साल कुल मिलाकर (पावर व डिस्टलरी सहित) बैलेंस सीट की बात करें, तो हम डेढ़ से दो करोड़ रुपये के नुकसान में थे।

इस साल जुलाई से लेकर अब तक पिछले 3-4 माह में कीमतें संतोषजनक स्तर पर रही हैं। इस लिहाज से आने वाले दिनों में इंडस्ट्री की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। इस साल उम्मीद है कि हमारा टर्नओवर करीब 700 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा।

नीतिगत बदलावों के स्तर पर पालीवाल ने बताया कि यूपी में शुगर इंसेंटिव पॉलिसी को फिर से बहाल किए जाने की जरूरत है। 2004-2007 के दौरान राज्य सरकार की शुगर इंसेंटिव पॉलिसी के चलते राज्य की चीनी मिलों ने करीब 7,000 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे उत्पादन में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई।

इस पॉलिसी के पहले राज्य में जहां रिकॉर्ड चीनी उत्पादन 56 लाख टन (2002-03) था, वहीं इस पॉलिसी के बाद यह 84 लाख टन सालाना तक पहुंच गया। यह मिलों और किसानों के हित में है कि राज्य सरकार शुगर इंसेंटिव पॉलिसी को फिर से बहाल करे।

कंपनी की विस्तार योजनाओं के बारे में पालीवाल ने बताया कि पिछले 2-3 सालों से हम विस्तार पर फोकस किये हुए हैं। हाल ही में कंपनी ने कोल्हापुर में एक रिजनेबल शुगर फैक्ट्री का अधिग्रहण किया है। भविष्य में भी हम बेहतर प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण को लेकर गंभीर हैं।

मालूम हो कि, कोल्हापुर में अधिग्रहीत की गई चीनी मिल के अलावा कंपनी की सीतापुर के रामगढ़ व जवाहरपुर और शाहजहांपुर में चीनी मिलें हैं। इन मिलों की कुल गन्ना पेराई क्षमता 22,500 टीसीडी (टन गन्ना प्रतिदिन) है। उत्तर प्रदेश की अपनी मिलों के नुकसान में रहने के बावजूद महाराष्ट्र में अधिग्रहण करने की वजह को स्पष्ट करते हुए नरेश पालीवाल ने बताया कि महाराष्ट्र में फसल की रिकवरी अधिक और समस्याएं कम हैं।

फसल उत्पादकता उत्तर प्रदेश में प्रति हेक्टेयर जहां 50-60 टन है, वहीं महाराष्ट्र में 80-90 टन प्रति हेक्टेयर है। यूपी में प्रति क्विंटल गन्ना पर शुगर उत्पादन अधिकतम 9 किलो है, जबकि महाराष्ट्र में 11-12 किलो तक है। कुल मिलाकर देखें तो उत्तर प्रदेश में लागत अधिक और रेवेन्यू कम है।
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