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आधार कार्ड को लेकर राज्यों में असमंजस

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Fri, 16 Nov 2012 08:19 PM IST
confusion in states on adhar card
एक तरफ केंद्र सरकार जहां एक जनवरी से देश के 51 जिलों में आधार कार्ड के जरिए नकद सब्सिडी देने की तैयारी कर रही है। वहीं उसको लागू करने वाले राज्यों में आधार कार्ड को लेकर ही असमंजस है।
राज्यों के अनुसार उन्हें इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि आधार कार्ड के जरिए लोगों के बैंकों में खाते खुलने में परेशानी आ रही है। शुक्रवार को वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के साथ उत्तर भारत के राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह बात सामने आई है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दिल्ली सहित दूसरे राज्यों ने भी इस बात को लेकर चिंता जताई है कि आधार कार्ड के जरिए लोगों के बैंक खाते खोलने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में इसे दूर करने के कदम उठाए जाने चाहिए।

राज्यों की चिंता पर वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवाओं के सचिव डीके मित्तल ने कहा कि आधार कार्ड केवल नो-फ्रिल खाते खोलने के लिए उचित है, इसका इस्तेमाल सामान्य खाते के लिए नहीं हो सकता है। मित्तल के अनुसार देश के छह सार्वजनिक बैंक आधार कार्ड के जरिए नकद सब्सिडी ट्रांसफर के लिए तैयार हो चुके हैं। राज्यों की जो भी चिंताएं उसे बैंकों के साथ मिलकर दूर कर लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय आधार कार्ड बनाने के लिए विशेष शिविर लगाने की भी तैयारी कर रहा है।

सरकार 1 जनवरी 2013 से देश के 16 राज्यों के 51 जिलों में नकद सब्सिडी देने की तैयारी कर रही है। आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर इसके पहले बैंकों में भी असमंजस हो चुका है। बैंक आधार कार्ड को केवाईसी के लिए पूर्ण मान रहे थे, जिसके बाद आरबीआई ने सिंतबर 2012 में अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया था कि बैंक आधार पर दिए गए आवेदक के पते की सत्यता की जांच अपने स्तर पर खुद करें। यानी, आधार कार्ड केवल पहचान पत्र के रूप में हो सकता है। अब तक देश में करीब 21 करोड़ आधार कार्ड जारी हुए हैं, पर बैंक खातों से फिलहाल केवल डेढ़ लाख कार्ड ही जुड़ सके हैं।

राज्यों के साथ हुई बैठक में वित्त मंत्री ने कृषि लोन में तेजी लाने में सहयोग देने तथा राज्य स्तरीय बैंकर्स की बैठक में राज्य अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाने की भी बात कही है। इसके अलावा बैठक में हरियाणा सहित दूसरे राज्यों ने सहकारी समिति के रिवाइवल के लिए कर्ज जारी करने की मांग की है।

हालांकि, इस मामले पर वित्त मंत्री ने कहा कि कई सहकारी समितियों की एनपीए बहुत ज्यादा है। ऐसे में नए कर्ज देने के पहले भुगतान की स्थिति देखना जरूरी है। सहकारी समितियों के रिवाइवल के लिए किसी तरह के पैकेज देने की मांग को फिलहाल सरकार ने नहीं माना है। शुक्रवार को हुई बैठक में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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