आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

इस बार भी चीन के पक्ष में रहा व्यापारिक पलड़ा

पिथौरागढ़/चंद्रशेखर जोशी

Updated Thu, 01 Nov 2012 11:58 PM IST
china trade balance in favor compare india
दुनिया की आर्थिक महाशक्ति चीन और दुनिया में तेजी से उभरती आर्थिक ताकत भारत के बीच उत्तराखंड के स्थल मार्ग से होने वाला इस साल का कारोबार संपन्न हो गया। दोनों पक्षों के बीच कुल 3.58 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। व्यापारिक पलड़ा इस बार भी चीन के पक्ष में रहा।
जून से अक्तूबर तक हुए व्यापार में 2.77 करोड़ रुपये का आयात हुआ। वहीं निर्यात महज 81.15 लाख रुपये का रहा। आयात-निर्यात के बीच असंतुलन की मुख्य वजह निर्यात होने वाली ज्यादातर खाद्य सामग्री होना है। इसके अलावा भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी तक चीनी कारोबारियों की दस्तक नहीं होने का भी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

भारत और चीन के बीच हुए समझौते के बाद वर्ष 1992 से पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे से व्यापारिक गतिविधियां चल रही है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के ट्रेड अधिकारी केएस रावत ने बताया कि साल 2012 में 2,77,74,912 रुपये की चीनी सामग्री भारत आई। जबकि यहां से 81,15,840 रुपये की खरीद चीन ने की। जबकि पिछले साल आयात 1.49 करोड़ और निर्यात 1.12 करोड़ रुपये का रहा।

भारत से चीन जाने वाली सामग्रियों में सबसे अधिक मात्रा मिश्री और गुड़ की रही। इसके अलावा कॉफी, सुरती, नारियल, जड़ीबूटी, सूखे मेवे, ऊनी कपड़ों का निर्यात किया गया। जबकि चीन से सबसे ज्यादा पशम ऊन भारत आई।

इसके अलावा रेडीमेड कपडे़, जूते, कंबल, रजाई, रेशम, बकरियों की भारतीय व्यापारियों ने खरीद की। भारत की ओर से इस बार 138 कारोबारी चीनी व्यापारिक मंडी तकलाकोट गए। विभाग ने ये ब्यौरा भारतीय वाणिज्य विभाग को भेज दिया है।

व्यापारिक पलड़ा चीन के पक्ष में होने का बड़ा कारण चीन में डिमांडेड भारतीय सामग्रियों की टिकाऊ प्रवृत्ति का नहीं होना है। चीन के बाजार में गुड़, मिश्री की खूब पसंद है लेकिन यह अधिक वक्त तक सुरक्षित नहीं रह पाती है। वहीं चीन का ज्यादातर सामान टिकाऊ प्रवृत्ति का है। इसके अलावा भारत की व्यापारिक मंडी गुंजी में चीनी व्यापारियों के नहीं पहुंचने का निर्यात पर विपरीत असर पड़ता है।

वर्ष 2003 से चीन का एक भी व्यापारी भारतीय मंडी गुंजी नहीं पहुंचा। और ये हाल इस बार भी ऐसा ही रहा। भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष पदम सिंह रायप्पा एवं महासचिव दीवान सिंह गर्ब्याल का कहना है कि भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी में जरूरी सुविधाओं की कमी है। इस वजह से चीनी व्यापारी यहां आने से कन्नी काट रहे हैं।

डीएम चंद्रमोहन सिंह बिष्ट का कहना है कि चीनी व्यापारियों के गुंजी नहीं आने की सबसे बड़ी वजह सड़क का अभाव है। इस क्षेत्र में सड़क का निर्माण किया जा रहा है। सीमा सड़क संगठन इस सड़क को वर्ष 2016 तक पूरा कर लेगी। रोड बनने के बाद गुंजी की कारोबारी मंडी में भी चहलपहल हो सकेगी।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

india china trade

स्पॉटलाइट

LG G6 की बिक्री अमेजॉन पर शुरू, मिल रहे हैं बंपर ऑफर

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

आईफोन 6 पर मिल रही है 26,000 रुपये की छूट

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'बहन होगी तेरी' की रिलीज डेट आई सामने

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

'सरकार 3' के लुक पर बोले बिग बी 'मजाक कर रहा हूं'

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

खाने के बाद मीठे की तलब? कहीं बना ना दे आपको बीमार

  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top