आपका शहर Close

फुटवियर कंपोनेंट उद्योग ने छुड़ाए चीन के पसीने

कानपुर/विष्णु सोनी

Updated Fri, 21 Dec 2012 12:21 AM IST
china rescued sweat footwear component industry
मेड इन चाइना फॉर्मूला इंडियन फुटवियर कंपोनेंट इंडस्ट्री में फ्लॉप रहा है। इंडस्ट्री ने अपने परफार्मेंस से चीन को पस्त कर दिया है। घरेलू फुटवियर उद्योग कुछ साल पहले तक जहां बड़े पैमाने पर चीन से फुटवियर कंपोनेंट्स का आयात करती थी, अब यह चीन को इसका निर्यात किया जा रहा है। इस साल अब तक कुल 1,350.60 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया है, जो कि पिछले साल समान अवधि के दौरान 1,047.34 करोड़ रुपये था। इस तरह कंपोनेंट्स एक्सपोर्ट में करीब 30 फीसदी की यह तेजी ऐसे समय में आई है, जबकि सरकार इस पर खास ध्यान नहीं दे रही है।
चीन को फुटवियर सोल निर्यात करने वाली एसआर यूनिवर्सल के मालिक और उत्पादकों के संगठन इफकोमा के प्रेसिडेंट सुधीर रुस्तगी ने बताया कि मौजूदा समय में ह्यूगो बॉस और सिऑक्स जैसे इंटरनेशनल ब्रांड्स फुटवियर बनाने में भारतीय सामान का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन ब्रांड्स के जूतों की रेंज 30,000 रुपये से शुरू होती है और ये अपनी क्वॉलिटी के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं, इसलिए इनका भारतीय कंपोनेंट्स पर भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि रीबॉक, एडिडास और नाइकी जैसे ब्रांड्स ने चीन में अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस बना रखे हैं, लेकिन वे इंडियन कंपोनेंट्स इंपोर्ट करते हैं। रुस्तगी का कहना है कि चीन सरकार अपने यहां के उद्योगों को भारी भरकम सब्सिडी दे रही है, जिससे उन्हें सहूलियत होती है, जबकि हमारे देश में कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को उत्पाद कर और सेवा कर चुकाना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार कंपोनेंट निर्माताओं को निर्यातक का दर्जा दे दे, तो निर्यात में और तेजी आ सकती है। इफकोमा के डिप्टी डायरेक्टर एसके वर्मा ने बताया कि रेगुलेटरी क्लीयरेंस के मोर्चे पर भी चीन में कारोबारियों को बहुत सहूलियतें हैं। रुस्तगी ने कहा कि आज दुनिया का ऐसा कोई मुल्क नहीं है, जहां भारतीय कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई न करती हों। उन्होंने कहा कि दो अरब डॉलर के घरेलू मार्केट में भारतीय कंपनियों का दबदबा है, जबकि कुछ साल पहले तक आयात के भरोसे था। मौजूदा समय में घरेलू बाजार में भारतीय फुटवियर कंपोनेंट कंपनियों की हिस्सेदारी 80 फीसदी है।

इफकोमा ने जनरल सेक्रेटरी प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि एक जोड़ी जूते तैयार करने में 32 कंपोनेंट्स लगते हैं। आज हमारी घरेलू कंपनियां इन सभी कंपोनेंट्स का निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, पाकिस्तान, चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश, इटली, जर्मनी इन सभी मुल्कों को कर रही हैं। कुछ साल पहले तक फुटवियर कंपोनेंट एक्सपोर्ट में हमारा वजूद नहीं था। पाकिस्तान ने भी प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट पर लगी रोक हटा दी है।

भारत के कंपोनेंट निर्यात में यूरोपीय मुल्कों की हिस्सेदारी 46 फीसदी है। जबकि बाकी का निर्यात अमेरिका, लेटिन अमेरिका, सार्क देशों और अफ्रीकी देशों को किया जाता है। श्रीवास्तव ने बताया कुछ साल पहले तक 40 फीसदी फुटवियर कंपोनेंट का आयात किया जाता था, लेकिन आज की तारीख में अगर आप इटली और फ्रांस में भी कोई जूता खरीदेंगे तो उसमें 25-30 फीसदी कंपोनेंट भारतीय कंपनियों के होंगे।


पिछले एक साल में चीन के जैन झाऊ में करीब 1,500 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां बंद हुई हैं। साथ ही वहां मजदूरी भी बढ़ी है। भारतीय कारोबारियों के लिए यह अच्छा मौका है। अगर उन्हें सरकार का साथ मिले तो कारोबार की रफ्तार बढ़ सकती है।
सुधीर रुस्तगी, प्रेसिडेंट, इफकोमा


Comments

स्पॉटलाइट

19 की उम्र में 27 साल बड़े डायरेक्टर से की थी शादी, जानें क्या है सलमान और हेलन के रिश्ते की सच

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

साप्ताहिक राशिफलः इन 5 राशि वालों के बिजनेस पर पड़ेगा असर

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

ऐसे करेंगे भाईजान आपका 'स्वैग से स्वागत' तो धड़कनें बढ़ना तय है, देखें वीडियो

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान के शो 'Bigg Boss' का असली चेहरा आया सामने, घर में रहते हैं पर दिखते नहीं

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

आखिर क्यों पश्चिम दिशा की तरफ अदा की जाती है नमाज

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!