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डीजल के बाद चीनी महंगा करने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क

Updated Fri, 21 Sep 2012 11:07 AM IST
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केंद्र सरकार ने इस बार आपके त्योहारों को फीका करने की पूरी तैयारी कर ली है। डीजल व रसोई गैस महंगा करने के बाद केंद्र अब चीनी के दाम बढ़ाने पर विचार कर रहा है। मंगलवार को कैबिनेट की होने वाली बैठक में राशन दुकानों से बांटी जाने वाली चीनी की मूल्य वृद्धि पर फैसला हो सकता है। चीनी के दामों में बढ़ोतरी का यह फैसला 10 साल बाद किया जाएगा।
मंगलवार की बैठक के लिए तैयार कैबिनेट नोट में चीनी के दाम बढ़ाए जाने के संकेत खाद्य मंत्रालय ने दिए हैं। हालांकि खाद्य मंत्रालय ने कैबिनेट नोट में चीनी के दाम कितने बढ़ाए जाने हैं, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन बिना सब्सिडी वाली चीनी का मूल्य 25.37 रुपए प्रति किलो जरूर बताया गया है। मंत्रालय ने यह फैसला प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल पर छोड़ दिया है।

फिलहाल, राशन दुकानों से गरीबी रेखा के नीचे के उपभोक्ताओं को 13.50 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर चीनी दी जाती है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से कुल 27 लाख टन चीनी का वितरण किया जाता है। नियमानुसार, मिलों को अपने कुल उत्पादन का 10 फीसद चीनी रियायती दर पर सरकार लेवी चीनी के रूप में सरकार को देना पड़ता है।

सरकार मिलों से 19.10 रुपए प्रति किलो के भाव पर चीनी की खरीदती है। लेकिन इसे बीपीएल उपभोक्ताओं को 13.50 रुपए से 15 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जाता है। मूल्यों के इस अंतर का भुगतान केंद्रीय सब्सिडी के माध्यम से किया जाता है। खाद्य मंत्रालय के कैबिनेट नोट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इस अंतर के भुगतान का बोझ राज्यों पर डाला जाना चाहिए। खासतौर पर मिलों से चीनी की ढुलाई, उत्पाद शुल्क का भुगतान और अन्य खर्च का दायित्व राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

कैबिनेट नोट में यह भी कहा गया है कि चीनी मूल्य में प्रति एक रुपये की वृद्धि से 270 करोड़ रुपए की खाद्य सब्सिडी कम हो जाएगी। चीनी उद्योग लेवी चीनी की वसूली को लेकर खासा नाराज रहता है। उसका कहना है कि उसे उत्पादन लागत के 60 फीसद पर लेवी चीनी देना पड़ता है। इससे उन्हें सालाना हजारों करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ता है।
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