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चिंताजनक है संसाधनों का अंधाधुंध दोहन

Market

Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
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दुनिया भर में आर्थिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किए जाने पर अर्थशास्त्रियों ने गहरी चिंता जताई है। साथ ही प्रकृति के अनुकूल और समानता पर आधारित ग्लोबल अर्थव्यवस्था का ढांचा खड़ा करने पर बल दिया गया है।
हांगकांग में आयोजित विश्व हिन्दू आर्थिक मंच के शिखर सम्मेलन में दुनिया के जाने माने अर्थशास्त्रियों, व्यवसायियों, उद्योगपतियों और प्रबंध विशेषज्ञों ने ग्लोबल अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती पर चिंता जताई। सम्मेलन में आर्थिक संकट से निपटने के लिए तात्कालिक उपाय करने के बजाय एक ऐसी व्यवस्था खड़ी करने पर बल दिया गया, जिससे धरती को साधन संपन्न और लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मारीशस के उप प्रधानमंत्री अनिल कुमार बचू ने दुनिया में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक विषमता तथा बढ़ते वित्तीय संकट के लिए वर्तमान आर्थिक ढांचे को दोषी करार दिया। उन्होंने दुनिया के अर्थशास्त्रियों से अपील की कि दुनिया के लिए एक ऐसा आर्थिक ढांचा बनाया जाना चाहिए, जो गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी खत्म करे, पर पर्यावरण और सतत विकास के पक्ष में हो।

सम्मेलन में यूरोप, अफ्रीका, एशिया और अमेरिकी महाद्वीप के विभिन्न देशों से आए लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मंच का अगला सम्मेलन वर्ष 2013 में थाईलैंड में होगा। सम्मेलन में अर्थ शास्त्री डा. सुब्रमण्यम स्वामी, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर डा. गौतम सेन, भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) बंगलूरू के प्रोफेसर डा आर वैधनाथन, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख डा. जी माधवन नायर, लंदन चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इण्डस्ट्रीज के प्रमुख सुभाष ठुकराल, परम कंप्यूटर के अन्वेषक तथा सेंटर फॉर डवलपिंग एडवांस कंप्यूटिंग के पूर्व निदेशक डा. विजय टकर, जैन ईरीगेशन के डीएन कुलकर्णी सहित अनेक लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन में तात्कालिक और दीर्धकालिक (लांग टर्म) आर्थिक लक्ष्य निर्धारित करने, उन्हें पूरा करने हेतु एक विश्वव्यापी समर्थ संस्थान बनाने। अन्वेषण व तकनीकी ज्ञान के विस्तार आदि अनेक विषयों पर गहन विचार विमर्श किया।

गौरतलब है कि विश्व हिन्दू आर्थिक मंच की स्थापना आर्थिक संसाधनों को बढ़ा कर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने व आर्थिक विशेषज्ञों के तकनीकी ज्ञान को व्यवसायियों के काम का बनाने व विशेषज्ञों, बैंकरों तथा निवेशकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य समृद्ध विश्व समाज की स्थापना करना है।
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