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वित्त मंत्रालय पीएम के पास रहे, तो बेहतर: बसु

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Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह यदि वित्त मंत्रालय का प्रभार अपने पास रखते हैं तो यह राष्ट्र के लिए अच्छा होगा। बसु ने एक साक्षात्कार में कहा कि अगले वित्त मंत्री के सवाल पर वह टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री इस मंत्रालय का प्रभार अपने पास रख सकते हैं। प्रधानमंत्री कुशल अर्थशास्त्री हैं व 1991 में उन्होंने आर्थिक सुधारों को गति दी थी।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री बनाने का निर्णय राजनीतिक स्तर पर होता है। कौन आता है, कौन जाता है। यह मुद्दा नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि जो व्यक्ति वित्त मंत्री बने, वह इस पद के लिए पूरी तरह सक्षम हो। बसु ने स्वीकार किया कि गठबंधन राजनीति से सरकार के निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है और अब निर्णय लेने का वक्त आ चुका है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मामलों को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है।

पिछली तिमाही में आर्थिक विकास दर की वृद्धि 5.3 प्रतिशत पर आ गई। घरेलू स्तर पर भी समस्याएं हैं, लेकिन इसे भी स्वीकार करना चाहिए कि ग्लोबल परिस्थितियों की वजह से भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। यदि हम इसे नहीं स्वीकार करेंगे, तो यह देश के साथ अन्याय होगा। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक गठबंधनों में उभरे मतभेदों पर बसु ने कहा कि इससे सरकार को एक अवसर मिला है और घटक दलों को मिलकर सुधार को आगे बढ़ाने के लिए बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है सरकार का प्रत्येक व्यक्ति भ्रष्ट है।

उन्होंने सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासनिक सुधार समय की जरूरत है। नौकरशाही को यह मानना चाहिए कि यह राष्ट्रहित में है। देश के बगैर नेता के चलने से संबंधित टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वह इससे सहमत नहीं है। यह ऐसी स्थिति नहीं है कि देश नेतृत्व विहीन है। यह एक गठबंधन सरकार है। इसमें एक व्यक्ति निर्णय नहीं ले सकता है।

उन्होंने कहा कि यहां तानाशाही नहीं है और गठबंधन सरकार में सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाते हैं। इसमें कुछ मतभेद हो सकते हैं और ऐसी समस्या अमेरिका, फ्रांस और यूनान में भी है। रुपये में जारी गिरावट की तुलना 1990 की गिरावट से करने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति की वर्ष 1990 से तुलना नहीं की जा सकती है। 1990 में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी लगभग शून्य थी, लेकिन वर्तमान में यह चार प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। उस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पांच अरब डॉलर से भी कम था, लेकिन अभी यह 300 अरब डॉलर के आसपास है। निर्यात भी बढ़ रहा है।

एफडीआई से किसानों व ग्राहकों को भी लाभ
वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने मल्टी ब्रांड खुदरा कारोबार के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि इससे किसानों के साथ ही खरीदारों को भी लाभ होगा। बसु ने कहा कि खुदरा कारोबार में एफडीआई होना चाहिए, लेकिन राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि प्रांरभ में इससे छोटे कारोबारियों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव हो सकता है, लेकिन इस क्षेत्र के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। बडे़ स्टोर आ सकते हैं और उससे दोगुनी संख्या मेंछोटे स्टोर भी आ सकते हैं। मल्टी ब्रांड में रिटेल में एफडीआई इसके लागू होने के बाद भारतीय आर्थिक विकास पर इसके प्रभाव को देखा जा सकेगा।
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