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'सोनिया और मनमोहन के चलते बिगड़े आर्थिक हालात'

Market

Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) ने भारत की क्रेडिट रेटिंग स्पेक्यूलेटिव ग्रेड तक घटाने की चेतावनी दी है। एसएंडपी ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अलग भूमिकाएं होने के चलते ही देश में सुधारों की गाड़ी अटकी पड़ी है। आर्थिक उदारीकरण में रुकावट के लिए सहयोगी दल और विपक्ष जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि केंद्र सरकार में नेतृत्व ही इस संकट की जड़ है।
रेटिंग गंवाने वाला पहला ब्रिक देश बनेगा भारत?
एसएंडपी ने चेताया कि भारत इनवेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग गंवाने वाला पहला ब्रिक देश बन सकता है। एजेंसी ने यह चेतावनी देश में बढ़ती जा रही आर्थिक सुस्ती और आर्थिक नीतियों के निर्धारण में रोड़ा बन रहे राजनीतिक गतिरोध को देखते हुए दी है।

भारत की साख ‘ट्रिपल बी माइनस’
फिलहाल इनवेस्टमेंट ग्रेड कैटेगरी के मामले में भारत ब्रिक देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) में सबसे निचले स्तर पर है। भारत की साख ‘ट्रिपल बी माइनस’ है, जो निवेश ग्रेड में सबसे निचले पायदान की रेटिंग है। रूस और ब्राजील ‘बीबीबी’ रेटिंग के साथ भारत से एक पायदान ऊपर हैं।

विकास दर गिरने से घट सकती है रेटिंग
भारत के अलावा सभी ब्रिक देशों का आर्थिक परिदृश्य (आउटलुक) ‘स्थिर’ (स्टेबल) है, जबकि अप्रैल में एसएंडपी भारत के आउटलुक को घटाकर ‘नकारात्मक’ (निगेटिव) कर चुका है। एसएंडपी का कहना है कि भारत की विकास दर में गिरावट की वजह से रेटिंग घटने के आसार बढ़ गए हैं।

क्या होगा असर
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक यदि देश की क्रेडिट रेटिंग घटती है तो अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इससे न केवल देश में विदेशी निवेश में कमी आ सकती है, बल्कि विदेशी निवेश महंगा भी हो सकता है। देश में चल रही ढांचागत परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। रोजगार मिलने में लोगों को दिक्कत हो सकती है। नई परियोजनाएं लगाने में दिक्कतें आ सकती हैं। इसके चलते विकास की गति कुंद पड़ सकती है।

क्या कहा एसएंडपी ने
आर्थिक नीतियों पर कांग्रेस पार्टी बंटी हुई है और आर्थिक उदारीकरण को लेकर पार्टी में ही बड़ा विरोध है। इतना ही नहीं, सर्वोच्च राजनीतिक ताकत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास निहित है। वहीं, सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कर रहे हैं, जो जनता द्वारा निर्वाचित नहीं हैं और उनका अपना कोई राजनीतिक आधार नहीं है। इन समीकरणों के चलते नीति निर्धारण कमजोर हुआ है।

मूल्यांकन का मतलब क्या
इस मूल्यांकन पर निर्भर करता है कि उधार लेने वाले देश या कंपनी की माली हालत कैसी है और उनकी उधार लौटाने की क्षमता कितनी है।

कौन करते हैं रेटिंग
इस समय रेटिंग की दुनिया में तीन बड़े नाम हैं
--स्टैंडर्ड एंड पूअर
--मूडीज
--फिच

क्रेडिट रेटिंग के मायने
एएए - सबसे मजबूत और सबसे बेहतर
एए- अपने वादों को पूरा करने की बेहतर क्षमता
ए - अपने वादों को पूरा करने की क्षमता तो है लेकिन विपरीत परिस्थितियों का असर पड़ सकता है
बीबीबी - वादों को पूरा करने के क्षमता लेकिन विपरीत आर्थिक हालात से प्रभावित होनी की गुंजाइश
सीसी - वर्तमान में बहुत कमज़ोर
डी - उधार लौटने में नाकाम
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