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ऋण दरों में कटौती कर सकता है रिजर्व बैंक

Banking-Insurance

Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
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देश में विकास को गति देने, घरेलू मांग को बढ़ाने और उपभोक्ताओं की भावनाओं को मजबूती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) वर्ष 2012-13 की मौद्रिक नीति की सोमवार को होने वाली मध्य तिमाही समीक्षा में मुख्य ऋण दरों में 25-50 आधार अंकों की कटौती कर सकता है।
देश की अर्थव्यवस्था उच्च महंगाई दरों और निम्न विकास दर के आंकड़ों से जूझ रही है और इससे रिजर्व बैंक पर दरों में कटौती का दबाव बढ़ा है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़े के मुताबिक देश के औद्योगिक उत्पादन में अप्रैल माह में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.1 फीसदी की मामूली वृद्धि रही।

आंकड़े के मुताबिक कारोबारी साल 2011-12 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 2.8 फीसदी रही, जो इससे पिछले वर्ष 8.2 फीसदी थी। इस अवधि में खनन और विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट रही। आलोच्य अवधि में खनन क्षेत्र में 3.1 फीसदी की गिरावट रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 0.1 फीसदी वृद्धि रही। बिजली क्षेत्र में हालांकि 4.6 फीसदी वृद्धि रही।

मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह गिरावट अक्टूबर 2011 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। अक्टूबर 2011 में इसमें 4.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में फरवरी माह में 4.1 फीसदी की वृद्धि रही थी।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक कारोबारी साल 2011-12 के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 2.8 फीसदी रही, जो कि पिछले वर्ष 8.2 फीसदी थी। रिजर्व बैंक सोमवार को मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा जारी करेगा और आलोच्य अवधि में सामने आए कमजोर आर्थिक संकेतकों के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) और रेपो दर में कटौती हो सकती है।

दरों में कटौती का संकेत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को उम्मीद जताई थी कि सुस्त विकास दर और उच्च महंगाई दर से सम्बंधित चिंता को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति को समायोजित करेगा। मुखर्जी ने कहा था, "सभी पहलुओं को देखते हुए मुझे विश्वास है कि वे (रिजर्व बैंक) मौद्रिक नीति को समायोजित करेंगे।"

उन्होंने कहा, "मुख्य रणनीति घरेलू मांग को बढ़ाने की होनी चाहिए।" सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वित्त वर्ष 2011-12 की अंतिम तिमाही में नौ साल के निचले स्तर 5.3 फीसदी पर पहुंच गई। उधर खाद्य महंगाई दर मई में बढ़कर फिर से दोहरे अंक (10.74 फीसदी) में पहुंच गई। इससे पिछले माह में यह 8.25 फीसदी थी।

महंगाई दर मई माह में 7.55 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल महीने में इसमें 7.23 फीसदी की बढ़त थी। आलोच्य अवधि में भोज्य पदार्थो की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई। सब्जी, दाल, दूध, अंडे, मांस और मछली के दाम बढ़े और खाद्य महंगाई दर दोहरे अंकों में 10.74 फीसदी पर पहुंच गई।

सब्जियों की कीमत आलोच्य अवधि में साल दर साल आधार पर 49.43 फीसदी बढ़ी, आलू की कीमत 68.10 फीसदी, दूध की कीमत 11.90 फीसदी, अंडे, मांस और मछलियों की कीमत 17.89 फीसदी और दाल की कीमत 16.61 फीसदी बढ़ी।

इसी अवधि में विनिर्मित उत्पाद 5.02 फीसदी, ईंधन और बिजली 11.53 फीसदी और पेट्रोल 10.51 फीसदी महंगे हुए। पिछले साल की समान अवधि में थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर में 9.56 फीसदी की बढ़त थी। ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि देश में उच्च महंगाई और सुस्त विकास की समस्या बनी हुई है।
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