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जानिए...आखिर कौन है सांता क्लॉज...

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।

Updated Fri, 14 Dec 2012 11:48 AM IST
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इंतजार खत्म होने वाला है, 25 दिसंबर को क्रिसमस के मौके पर बच्चों के प्यारे सांता क्लॉज इन दिनों गिफ्ट्स की पोटली तैयार करने में जुटे हैं। एक बार फिर सजेंगे क्रिसमस ट्री, गूंजेगी जिंगल्स बेल की आवाज और फिर होगी तोहफों की बरसात। हो..हो..हो..कहते हुए लाल-सफेद कपड़ों में बड़ी-सी सफेद दाढ़ी और बालों वाले सांता क्लॉज फिर आएंगे बच्चों के चेहरे पर खुशियां बिखेरने। कंधे पर तोहफों से भरी पोटली, हाथ में क्रसमस बेल लिए सांता क्लॉज का इंतजार हर बच्चे को रहता है। पश्चिमी देशों की बात छोड़ दी जाए तो अधिकतर देशों के लोग नहीं जानते कि सांता क्लाज कौन हैं और कहां से आते हैं। सांता की तरह उनका ‌इतिहास भी बहुत ही निराला है।
क्रिसमस और सांता
क्रिस क्रिंगल फादर क्रिसमस और संत निकोलस के नाम से जाना जाने वाला सांता क्लॉज एक रहस्यमय और जादूगर इंसान है, जिसके पास अच्छे और सच्चे बच्चों के लिए ढेर सारे गिफ्ट्स हैं। कहा जाता है कि क्रिसमस के दिन सांता बर्फ की चादर से ढंके उत्तरी ध्रुव से आठ उड़ने वाले रेंडियर की स्लेज गाड़ी पर सवार होकर आते हैं।  सांता के रेंडीयरों के नाम हैं, ‘‘रुडोल्फ़, डेशर, डांसर, प्रेन्सर, विक्सन, डेंडर, ब्लिटज़न, क्युपिड और कोमेट’’। वास्तव में सांता क्लॉज एक पौराणिक चरित्र है। उन्हें ‘‘संत निकोलस’’, क्रिस क्रींगल, क्रिसमस पिता (फादर) भी कहा जाता है।

आप भी सोच रहे होगे कि आखिर सांता के रेंडियर उड़ते कैसे होंगे! क्रिसमस और सांता क्लॉज से कई मान्यताएं जुड़ी हैं। कहा जाता है कि बरसों पहले जब सांता क्लॉज ने जब रेंडियरों पर झिलमिलाती हुई मैजिक डस्ट डाली, तो वे फुर्र से उड़ गए। मैजिक डस्ट छिड़कने से रेंडियर क्रिसमस लाइट की स्पीड से उड़ने लगते, ताकि सांता हर बच्चे के पास पहुंचकर उन्हें गिफ्ट दे सकें। बच्चे गहरी नींद में सो जाते हैं, तो सांता तोहफा रखकर अगले बच्चे के घर निकल जाते हैं।

आज से करीब डेढ़ हज़ार साल पहले जन्मे संत निकोलस को असली सांता और सांता का जनक माना जाता है। हालांकि संत निकोलस और जीसस के जन्म का सीधा संबंध नहीं रहा है, लेकिन उनके बिना अब क्रिसमस अधूरा सा लगता है। संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी (300 ए.डी.) में जीसस की मौत के 280 साल बाद तुर्किस्तान के मायरा नामक शहर में हुआ। वे एक रईस परिवार से थे। निकोलस जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

वे चाहते थे कि क्रिसमस और नए साल के दिन गरीब-अमीर सभी खुश रहें। संत निकोलस को बच्चों से ख़ास लगाव था। ईसा मसीह के जन्मदिन पर वे किसी को दुखी नहीं देख सकते थे। इसलिए क्रिसमस के दिन वे लोगों को तोहफे के तौर पर खुशियां बांटने निकल पड़ते थे। गरीबों के घर जाकर वे खानपान की सामग्री एवं बच्चों के लिये खिलौने बांटा करते थे। संत निकोलस अपने उपहार आधी रात को ही देते थे क्योंकि उन्हें उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं था। इसी कारण बच्चों को जल्दी सुला दिया जाता। उनकी इस उदारता के कारण निकोलस को संत कहा जाने लगा। संत निकोलस की मृत्यु के बाद वेश बदलकर सांता बनना, गरीबों और बच्चों को उपहार देने की एक प्रथा सी बन गई। बाद में यही संत निकोलस सांता क्लॉज के नाम से मशहूर हो गए। यह नया नाम डेनमार्क वासियों की देन है।

कैसा है सांता का हुलिया
निश्चित तौर पर आजकल जिस रूप में हम सांता को देखते हैं, शुरुआती दौर में उनका हुलिया ऐसा नहीं रहा होगा। तो फिर लाल और सफेद रंग के कपड़े पहने लंबी दाढ़ी और सफेद बालों वाले सांता का यह हुलिया आखिर आया कहां से? दरअसल 1822 ईसवी में क्लीमेंट मूर की नाइट बिफोर क्रिसमस में छपे सांता के कार्टून ने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया। थॉमस नैस्ट नामक पॉलिटिकल कार्टूनिस्ट ने हार्पर्स वीकली के लिए एक इलस्ट्रेशन तैयार किया था, जिसमें सफेद दाढी वाले सांता क्लॉज को यह लोकप्रिय शक्ल मिली। धीरे-धीरे सांता की शक्ल का उपयोग विभिन्न ब्रांड्स के प्रचार के लिए किया जाने लगा। आज के जमाने के सांता का अस्तित्व 1930 में आया। हैडन संडब्लोम नामक एक कलाकार कोका-कोला की एड में सांता के रूप में 35 वर्षों (1931 से लेकर 1964 तक) तक दिखाई दिया। सांता का यह नया अवतार लोगों को बहुत पसंद आया और आखिरकार इसे सांता का नया रूप स्वीकारा गया जो आज तक लोगों के बीच काफी मशहूर है
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