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रात के पहरेदार, रहें खर्राटों से खबरदार

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।

Updated Mon, 26 Nov 2012 11:47 AM IST
snoring isvery risky how to get rid
क्या आपके घर में किसी को खर्राटे लेने की आदत है? क्या आप भी खर्राटों की आवाज की वजह से रात में सो नहीं पाते हैं? अगर ऐसा है तो सतर्क होने की जरूरत है। अक्सर लोग खर्राटे की समस्या को सामान्य आदत समझकर हंसी में टाल जाते हैं। जबकि रिसर्च की मानें तो खर्राटे खराब स्वास्थ्य की तरफ इशारा करते हैं। लगातार खर्राटे लेने की वजह से कई खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं।
खर्राटों की एबीसी
सोते वक्त नाक से असामान्य रूप से निकलने वाली तेज आवाज को खर्राटा कहते हैं। मेडिकल साइंस में खर्राटों के लिए ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नी का इस्तेमाल किया जाता है। ये एक स्लीपिंग
डिसऑर्डर है। विशेषज्ञों के मुताबिक सांस में रुकावट के कारण खर्राटे आते हैं। खर्राटों के कारण नींद ढंग से पूरी नहीं होती है। शरीर दिन-भर सुस्ती में डूबा रहता है। दिन में बार-बार सोने की इच्छा होती है।
लगातार खर्राटों की वजह से कई बार सांस की नली में ज्यादा रुकावट आ सकती है। इससे व्यक्ति घुटन महसूस करने लगता है और हड़बड़ाकर उठ बैठता है। इस तरह के लक्षण एक गंभीर
बीमारी की चेतावनी हैं। लंबे समय तक इस तरह के लक्षण से ह्दय और मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
 
ये हैं कारण
1. महिलाओं की अपेक्षा पुरुष खर्राटे ज्यादा लेते हैं। क्योंकि पुरुषों की सांस की नली महिलाओं से पतली होती है।
2. नाक में सूजन, एलर्जी, साइनस से ग्रसित होने पर सोते वक्त सांस की नली में रुकावट आती है। इससे नली में वेक्यूम बन जाता है और खर्राटे आते हैं।
3. जुकाम ज्यादा दिनों तक रहने पर भी खर्राटों की समस्या शुरू हो जाती है।
4. नींद की गोलियों के सेवन, एलर्जी रोधक दवाओं से भी खर्राटे आने लगते हैं।
5. अधिक शराब और सिगरेट के सेवन से भी खर्राटों की बीमारी होने का खतरा रहता है।
6. मोटापा या अधिक वजन होने पर भी ये समस्या हो सकती है।


नाक की हड्डी बढ़ जाने के कारण भी खर्राटों की समस्या होती है। इसके अलावा मोटापा भी इसका एक बड़ा कारण है। मोटापे के कारण सांस की नली के आसपास फैट जमा हो जाता है। इससे सांस नली पर दबाव
पड़ता है, इसी वजह से खर्राटे आते हैं। जब शरीर सोते वक्त पूरी तरह आराम की स्थिति में होता है, तब मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं। मोटे व्यक्ति पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है। ढीली मांसपेशियों के साथ फैट
सांस की नली को दबाने लगता है। इसकी वजह से सांस की नली मे अवरोध पैदा होता है और सोते वक्त नाक से तेज आवाज खर्राटे के रुप में आती है।  

बच्चे भी हैं शिकार
खर्राटे लेने की आदत कई परेशानियों की तरफ इशारा करती है। इनमें जीभ का बड़ा होना, पुरानी सर्दी, नाक में मस्से होना या नाक का पर्दा सीधा न होने जैसे कारण शामिल हैं। आज के दौर में इस बीमारी से ग्रस्त लोगों की कोई आयु सीमा नहीं रह गई है। खर्राटों की बीमारी आजकल  युवाओं से लेकर किशोरों तक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। यहां तक कि कई बच्चों में में भी इसके लक्षण देखे गए हैं।


 ऐसे बचें
1. रात को देर तक न जागें ।
2. रात में संतुलित मात्रा में भोजन करें।
3. गले की एक्सरसाइज करें ताकि गले की मांसपेशियां टोन हो सकें।
4. स्मोकिंग और शराब से परहेज करें।
5. नींद की गोलियों का प्रयोग न करें।
6. योग से भी खर्राटों में राहत मिल सकती है।
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