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नरमुंडों का गांव जहां लिखा है- यहां आना मना है

इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 10 Oct 2012 12:54 PM IST
head hunter village visitor now allowed
एक ऐसा गांव जहां घुसने से पहले शरीर में डर के मारे झुरझुरी पैदा हो जाती है। जहां सीमा पर ही लिखा है - ‘विजिटर्स आर नाट एलाउड।’। कल्पना करने की जरूरत नहीं, भारत के ही अरुणाचल प्रदेश में एक ऐसा गांव हैं जहां बाहरी लोग जाने से कतराते हैं। गांव में जगह जगह नरमुंड पड़े हैं। नरमुंडों से भरे इस गांव में घर में नरमुंड शोपीस की तरह सजाए गए हैं, चौराहों पर रखे हुए हैं। यहां हैड हंटिंग यानी सजा के तौर पर सिर काटने की परंपरा कुछ दशक पहले तक जीवित था। और तो और इस परंपरा को अपनी आंखों से देखने वाले, अपने हथियारों से अंजाम देने वाले लोग आज भी इस गांव में मौजूद हैं।
अरुणाचल प्रदेश के तिराप जिले के खोंसा डिविजन से तकरीबन 15 किलोमीटर दूर जंगल में एक गांव है लेपनान। उस गांव में नंटा जाति के कबीले रहते हैं। उस कबीले का एक राजा है। कबीले का राजमहल है और उनकी एक अलग ही दुनिया है। उनके अपने नियम-कायदे हैं। वहां जाने से पहले कबीले के राजा की अनुमति जरूरी है और अगर किसी राजा की अनुमति न ली, तो तय मानिए कोई न कोई मुसीबत आने वाली है। राजा की अनुमति मिल जाए तो कबीले के उस गांव में प्रवेश करते ही आपको लगेगा मानो आप किसी रहस्यमय उपन्यास के किरदारों में शरीक हो गए हैं।

उस गांव के चप्पे-चप्पे पर आपको खौफ पसरा हुआ नजर आएगा। घरों में रखे हथियार, वहां रहने वालों का अंदाज आपको पल भर में बता देगा कि वे कितने खतरनाक और खूंखार हैं।  यहां रह रहे नंटा बिरादरी के लोग आपको गर्व से बताएंगे कि जिस जगह आप खड़े हैं, वहां तीन-चार दशक पहले तक इनसानों का शिकार होता था और शिकार के बाद जश्न मनाया जाता था। यही नहीं, इनसानों का शिकार करने वाले शिकारी राजा से शाबासी पाते थे। यही नहीं जान लेने वाले के लिए तो वह रात और भी खास बन जाती थी क्योंकि उसे कबीले के राजा के साथ शराब पीने का मौका मिलता था। उस कबीले के लोग आज भी गर्व के साथ उस घर को दिखाते हैं, जहां रखी हुई हैं मारे गए इनसानों की खोपड़ियां।  कबीले के लोग उस घर को मोरांग कहते हैं।

आज भी उस कबीले में कई नंटा लोग जिंदा हैं, जिन्होंने किसी जमाने में इनसानों का शिकार किया था। चाहे वह कोई दुश्मन रहा हो, या भूले-भटके वहां तक पहुंचने वाला कोई शख्स। इनसानों के उन शिकारियों से आपकी मुलाकात हो सकती है, लेकिन राजा की सहमति से। उनके शरीर पर बना टैटू आपको उनके हाथों मरने वाले इनसानों की संख्या बता सकते हैं। जो जितने लोगों को मारता था, उसके बदन पर उतने ही टैटू बना दिए जाते थे।  गांव-समाज में उसकी इज्जत उतनी होती थी। नंटा जाति के उन लड़ाकों के पास कुछ  बंदूकें भी हैं।

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