आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

इनकी बदौलत दीवाली का जश्न होगा और रंगीन...

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।

Updated Fri, 09 Nov 2012 01:19 PM IST
crackers make dewali more happening
रंग-बिरंगी लाइटिंग और तरह-तरह की मिठाइयों के बाद जो चीज दीवाली की खुशियों को दोगुना कर देती है वो हैं पटाखों की धूम। सिर्फ दीवाली ही क्यों, जीत और जश्न का कोई भी मौका पटाखों के बिना अधूरा ही रहता है। फिर चाहे बात शादी-ब्याह की हो, क्रिकेट मैच की या चुनावों का नतीजा आया हो। अब ये तो आपने पढ़ा होगा कि दीवाली क्यों मनाई जाती है, लेकिन पटाखों की परंपरा कब, कहां और कैसे शुरू हुई, ये बहुत कम ही लोग जानते हैं।
पटाखों की ये लड़ी चीन से चली
कई हजार साल पुरानी बात है। चीन के लोग गांव में आने वाले जंगली जानवरों और बुरी आत्माओं को भगाने के लिए बैंबू यानी बांस की लकड़ी को जलाते थे। बांस की लकड़ी खोखली होती है और उसमें बीच-बीच में गांठें होती हैं। जैसे ही ये लकड़ी आग पकड़ती, इसकी दो गांठों के बीच खोखले हिस्से में मौजूद हवा गर्मी से फैलने लगती और एक अजीब सी आवाज होती। इस आवाज से डरकर जानवर भाग जाते। आगे चलकर आतिशबाजी के इस अनोखे तरीके का इस्तेमाल नववर्ष पर हर बुरी बला और परेशानी को दूर करने के लिए भी किया जाने लगा। पुरानी कथाओं की मानें तो पहला पटाखा बैंबू से होने वाली आतिशबाजी को ही माना जाता है।

फिर बने फुलझड़ी, अनार और रॉकेट
चीन में अनजाने में ही पटाखे के जिस रूप की खोज हुई थी उसे मॉडर्न टच मिला इटली में। जब बैंबू का इस्तेमाल पटाखे की तरह होने लगा तो चीन के कीमीयागारों (रसायन वैज्ञानिक) ने कुछ रसायनों को मिलाकर एक ऐसा मिक्सचर तैयार किया, जिससे बैंबू को जलाने पर ज्यादा तेज आवाज आने लगी। ऐसा बताया जाता है कि 13 वीं सदी में इटली यात्री मार्को पोलो चीन से इसी मिक्सचर का कुछ सैंपल अपने साथ ले गए थे। इटली में इस मिक्सचर पर कुछ और प्रयोग किए गए और पटाखों के कई प्रकार सामने आए। इसके बाद इटली के साथ ही फ्रांस ने भी पटाखे बनाने की इस कला में महारत हासिल कर ली।
1830 तक इस्तेमाल होने वाले पटाखों से सिर्फ सफेद और संतरी रंग की चिंगारियां ही दिखाई देती थी। इसके बाद इटली में रसायनों का ऐसा मिक्सचर तैयार किया गया, जिनसे तेज आवाज के साथ रंग-बिरंगी चिंगारियां भी निकलने लगी। आज इस्तेमाल होने वाली फुलझड़ियां, अनार, चखरी और रॉकेट इन्हीं पटाखों का आधुनिक रूप हैं।

खुशियों के साथ जुड़े पटाखे
चीन, इटली और फ्रांस में खास अवसरों पर पटाखों का इस्तेमाल पहले ही किया जाने लगा था। इसके बाद 1486 में इंग्लैंड के राजा हेनरी VII की शादी का जश्न भी आतिशबाजी के साथ मनाया गया। इंग्लैंड के राजा चार्ल्स II ने तो खास तौर पर सेना के जवानों को पटाखे जलाने का प्रशिक्षण दिया, ताकि युद्ध जीतने का जश्न पटाखे चलाकर मनाया जा सके। इसके बाद अमेरिका में भी जुलाई, 1777 में मिली आजादी का जश्न पटाखों के साथ ही मनाया गया। अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन का स्वागत भी पटाखे चलाकर ही किया गया। धीरे-धीरे पटाखे हर रस्म, त्योहार और जश्न का खास हिस्सा बन गए।

  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

जानें क्या कहता है आपके आईलाइनर लगाने का अंदाज

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

रात में लाइट जलाकर सोते हैं तो हो जाएं सावधान

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

गीता बाली से शादी के बाद शम्मी कपूर की जिंदगी में हुआ था ये चमत्कार, रातोंरात बन गए थे सुपरस्टार

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

अगर आप हैं ऑयली स्किन से परेशान तो जरूर आपनाएं ये घरेलू उपाय

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +

54 वर्ष की उम्र में भी झलक रही है श्रीदेवी की खूबसूरती, देखें तस्वीरें

  • बुधवार, 23 अगस्त 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!