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'स्पेशल बीज' जो दिलाएंगे जानलेवा रोगों से मुक्ति

नई दिल्ली/विजय गुप्ता।

Updated Mon, 19 Nov 2012 12:29 PM IST
alasi is beneficial in cancer and heart attack
दिल की बीमारी और कैंसर ऐसे दो खतरें हैं जो आम आदमी को सदा भयभीत कि रहते हैं। लेकिन अलसी का तेल इन दोनों ही जानलेवा बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हो सकता है। खबर है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने अलसी की ऐसी किस्म खोजी है जिसमें न सिर्फ हृदय, कैंसर, मधुमेह और गठिया आदि रोगों पर लगाम लगाने की क्षमता है बल्कि पौरूष शक्ति बढ़ाने के गुण भी मौजूद हैं।
उन्नत गुणों से भरपूर अलसी के बीजों को वैज्ञानिकों ने अस्फालाइट फ्लक्ससीड नाम दिया है। आम आदमी तक बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना (एनएआईपी)के तहत इनके बीजो से रोजाना उपयोग की खाद्य वस्तुएं तैयार की हैं। जिनके रोजाना उपयोग से शरीर को गंभीर रोगो पर लगाम लगाने वाले आवश्यक ओमेगा 3 लिनोलेनिक अम्ल मिलता है। एनएआईपी के राष्ट्रीय निदेशक बंगाली बाबू ने बताया कि मानव शरीर विभिन्न वर्षो से विकसित यंत्रों में एक आश्चर्यजनक यंत्र है। यह हजारों घटक का उत्पादन कर सकता है।

लेकिन 49 घटकों को छोड़कर जिन्हें सिर्फ भोजन से ही प्राप्त किया जा सकता है। इनमें विभिन्न विटामिन, खनिज और आवश्यक वसा अम्ल शामिल हैं। वर्तमान आहार में ओमेगा 3 बसा अम्ल के अतिरिक्त बहुत से आवश्यक घटक मौजूद हैं। ओमेगा 3 और ओमेगा 6 आवश्यक वसा तत्व हैं। इन दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है क्योंकि ये विपरीत प्रभाव रखते हैं।

मौजूदा खानपान से ओमेगा 6 पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है। लेकिन ओमेगा 3 कम ही मिल पाता है। अत: यह जलने की क्रिया को कम करता है। जिसके कारण ह्रदय संबंधी रोग, गठिया, कैंसर और मधुमेह आदि रोगों को पनपने का मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि  ओमेगा 3 की कमी को पूरा करने के लिए वैज्ञानिक मछली के तेल की खोज पहले ही कर चुके हैं। लेकिन 60 फीसदी शाकाहारी लोगो के लिए इसका संभव नहीं है। लिहाजा वनस्पति में ओमेगा 3 की खोज की गई। जिसके तहत वैज्ञानिकों ने अलसी की खास किस्म की पहचान की है।

आम आदमी तक इसकी पहुंच बनाने के लिए संस्थान ने इसका खाद्य तेल, नट और अश्वागंधा व विटामिन ई को मिलाकर कैप्सूल तैयार किए हैं। खाद्य तेल का उपयोग रोजाना खाने में किया जा सकता है जबकि नट को भूनकर या आटे मे मिलाकर रोटी आदि के जरिए खाया जा सकता है। संस्थान ने कैप्सूल की बिक्री का अधिकार जहां गुरूकुल कांगड़ी को दिया है वहीं खाद्य तेल व अन्य उत्पादो के विपणन की जिम्मेदारी इनसिग्नस कंपनी को सौंप दी है।
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