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पहले ही दिन कॉलेज में हो गई फेमस

इंटरनेट डेस्क

Updated Wed, 05 Dec 2012 10:39 AM IST
उस दिन शर्म के मारे मैंने अपने हाथों से अपना चेहरा ढक लिया था। सारे लड़के टायलेट से बाहर चले गए... फिर कुछ देर बाद मेरे दिमाग की बत्ती जली कि मैं अभी तक यहाँ क्यूँ खड़ी हूँ, और मैं बाहर आ गयी, एंड फाइनली मेरा सपना सच हुआ, हर लड़के की निगाह सिर्फ मुझ पर थी। और पहले दिन के शुरूआती चंद घंटों में ही मैं अपने कॉलेज में फेमस हो गई थी।
अभी मैं बाहर पहुंचकर खुद को बैलेंस ही कर रही थी कि तभी बेल सुनाई दी और मैं फिर हड़बड़ाकर भागी। क्लासरूम में घुसने से पहले तीन बार चेक किया, कि इस बार जगह सही है ना। लग तो यूँ रहा था कि आधी से ज्यादा क्लास मुझे जानती हो, और उनकी खुसुर-फुसुर के बीच मैं आखिरी बेंच पर जा कर बैठ गयी। उस बेंच पर बैठकर मैं ये सोच रही थी, हाय! इस बेंच ने कितनी लव स्टोरीज बनती देखी होंगी..., हे बेंच देवता जल्दी से मेरा भी उद्धार कर देना, पचास रुपये का प्रसाद चढ़ाऊँगी।
पता नहीं ये बेंच देवता का कमाल था या मेरी किस्मत कि उसी वक़्त मैंने देखा एक स्मार्ट, गोरा, लम्बा सा लड़का मेरी तरफ आ रहा था। हाय! मैं तो उसे देखते ही बिछ गयी थी..., वो मेरे पास आ कर बोला, "हॉय! तुम्हीं वो लड़की हो जो आज जेंट्स रेस्टरूम में पहुंच गई थी?"। मैं क्या कहती। बस अपना सर हिला दिया, और मन ही मन ये सोचने लगी के अगर ये हर रोज़ मुझसे बात करे, तो मैं तो डेली जेंट्स टॉयलेट में घुस जाऊं। पर "एक लड़की की इज्ज़त और उसकी मर्यादा ही उसका गहना होता है..." माँ के ये प्रवचन मैं बचपन से सुनती आ रही हूं। यही सोच कर अपने बावरे मन को समझाया।
इतने में वो पलट के जाने लगा। मुझे यूँ लगा मानो जनम-जन्मान्तर का प्यार मुझसे दूर जा रहा हो। लगता है इस बेंच में 'बाथरूम वाली लड़की' अकेले ही बैठेगी। बेंच देवता, तुमने भी मेरी नहीं सुनी, जाओ प्रसाद कैंसिल।
खैर, कुछ ही देर में ये राज़ खुला के वो चिकना हमारा इंग्लिश का लेक्चरार अविनाश है, और अब से इंग्लिश मेरा फेवरेट सब्जेक्ट।
क्लास पर मैंने जब सरसरी निगाह दौड़ाई तो पाया के और भी कई लडकियां मेरे अविनाश को देखकर लार टपका रहीं थीं। मन आया कि उनके बाल नोच लूं। फिर लगा कि इतनी मैनाओं के बीच ये तोता मेरे ही पास क्यूँ आया? "पिंकी कुछ तो बात है तुझमें यार"। वैसे भगवान् इतने भी बुरे नहीं हैं। "जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है।" पहली बार मेरी माँ की कही कोई बात मुझे सही लगी। न जेंट्स बाथरूम में घुसी होती और न अविनाश मुझे पहचानता।
खैर, कॉलेज का पहला दिन खत्म होते होते मेरे मन में दो इच्छाएं जगा गया, पहली कि मैं अविनाश को पूरी तरह अपना बना लूं, और दूसरी... चलो अब बहुत रात हो गई। बाकी बातें कल :)
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