अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, ह्यूमन राइट्स वॉच ने संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के खिलाफ वोट देने के लिए भारत का स्वागत किया। संगठन ने कहा कि भारत सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के झूठ से अवगत हो चुका है।
अमेरिका स्थित इस मानवाधिकार संगठन के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन कर भारत ने सीरियाई लोगों का उचित समर्थन किया है। भारत, (बशर) असद के झूठ से परिचित हो चुका है, और उन्होंने खुद को दुनिया के एक स्वतंत्र नायक के रूप में प्रस्तुत किया है।’
भारत ने अपने रुख में बदलाव करते हुए शनिवार को असद पर अरब लीग समर्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। यह प्रस्ताव असद को सत्ता छोड़ने की सिफारिश करता है। जहां रूस और चीन ने प्रस्ताव के खिलाफ वीटो का इस्तेमाल किया, वहीं अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और पाकिस्तान ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा, ‘चार महीने पहले मास्को और बीजिंग द्वारा इस्तेमाल किए गए वीटो गैरजिम्मेदाराना थे। और आज, हफ्तों की रूसी कूटनीतिक चालों के बाद, और होम्स में जारी रक्तपात के बीच इस्तेमाल किए गए वीटो खतरनाक हैं।’
प्रवक्ता ने कहा है, ‘असद का विरोध कर रहे नागरिकों की मौतों की संख्या पिछले चार महीनों में दोगुने से भी अधिक हो गई है। और इस बात का खतरा बढ़ गया है कि असद प्रशासन इस दोहरे वीटो को और अधिक हिंसा करने के लिए हरी झंडी के रूप में लेगा।’
संगठन ने रूस पर आरोप लगाया कि वह एक ऐसी सरकार को बेशर्मी के साथ हथियारबंद कर रहा है और उसे कूटनीतिक कवच प्रदान कर रहा है, जो अपने ही लोगों की हत्या कर रही है।
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