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उर्दू शायर शहरयार को मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार

नई दिल्ली।
Story Update : Monday, September 19, 2011    1:09 AM
Urdu poet Shahryar found the Library Award

मशहूर उर्दू शायर प्रो. अखलाक मोहम्मद खान शहरयार को रविवार को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। सुबर्तो पार्क स्थित एयरफोर्स सभागार में भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में शहरयार को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने यह पुरस्कार दिया। इस मौके पर अमिताभ बच्चन ने पिता हरिवंश राय बच्चन की कृति मधुशाला का पाठ किया। उन्होंने कहा कि शहरयार ने हिंदी और उर्दू की दूरी को पाटने का काम किया है। हिंदी फिल्मों में भी उनका अहम योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।

भुलाया नहीं जा सकता शहरयार का योगदान
शहर में आज भी कोई अंजान सा क्यों है व सीने में जलन, आंखों में तूफान गजल शहरयार की याद को ताजा करती है। उमराव जान समेत अनेक फिल्मों में लिखे गए उनके गीत आज भी दिल को छू लेते हैं। इस मौके पर अमिताभ बच्चन ने प्रसिद्ध गीतकार गुलजार द्वारा शहरयार पर लिखी गई 88 नज्मों के कलेक्शन का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि शहरयार के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। उनकी गजलें आज भी अमर हैं। गुलजार ने भी शहरयार की गजलों की प्रशंसा करते हुए उन्हें उनकी रचनाओं को अमूल्य धरोहर बताया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मंत्री डा. पी. कदम, भारतीय ज्ञानपीठ के मेंबर ट्रस्टी आलोक जैन समेत अनेक लोग मौजूद थे।

अमर उजाला ब्यूरो


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