भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से गठित समिति ने इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर और तीन अन्य वैज्ञानिकों को दोषी ठहराया है। एंट्रिक्स-देवास डील को लेकर इन चारों वैज्ञानिकों को किसी सरकारी पद पर काम करने से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया है।
पूर्व मुख्य सतर्कता आयुक्त प्रत्युष सिन्हा की समिति ने शनिवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एंट्रिक्स देवास डील में पारदर्शिता नहीं थी। इस रिपोर्ट में नायर, ए भास्करनारायण, केआर श्रीधर मूर्ति और केएन शंकर के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मालूम हो कि नायर पर नियमों की अनदेखी करते हुए इसरो की इकाई एंट्रिक्स की ओर से निजी कंपनी देवास को 70 मेगाहर्ट्ज का एस बैंड स्पेक्ट्रम आवंटित करने का आरोप है।
मामले का खुलासा होने पर पिछले साल फरवरी में सरकार ने एंट्रिक्स देवास समझौता रद्द कर दिया था। मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूर्व सीवीसी प्रत्युष सिन्हा की अध्यक्षता में समिति का गठन कर दिया था। वहीं, सरकारी पद पर काम करने पर लगाई गई पाबंदी पर नायर भड़क उठे थे। उन्होंने इसे कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया था। नायर ने मौजूदा इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन पर आरोप लगाया था कि वह मामले में सरकार को गुमराह कर रहे हैं।
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