छठे व सातवें चरण में पार्टी का ग्राफ बढ़ाने के लिए सपा ने अपने अधिकतर मुसलिम नेताओं को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय होने को कहा है। इनमें वे विधायक भी शामिल हैं, जिनके यहां मतदान की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। कहा गया है कि विभिन्न इलाकों में जाकर छोटी-छोटी सभाएं करें और बताएं कि किसी अन्य दल को वोट देना सार्थक नहीं होगा, क्योंकि सरकार सपा की ही बनने वाली है। ग्रामीण इलाकों में घोषणापत्र में किए गए वादों को प्रचारित करने को भी कहा गया है।
दरअसल आबादी के बल पर मुसलिम मतदाता पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 50 से अधिक सीटों में नतीजों का रुख मोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। सपा की सारी उम्मीदें मुसलिम और गैर जाट मतों पर ही निर्भर है। पूर्व में सपा का ग्राफ इस इलाके में मुसलिम मतदाता ही बढ़ाते रहे हैं। पर इस बार न रशीद मसूद हैं और न ही शफीकुर्रहमान बर्क और सलीम शेरवानी। आजम खां अपनी सीट में फंसे हैं। दूसरे इलाकों में ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं। सारा दारोमदार स्थानीय नेताओं पर ही है। ऐसे में अन्य क्षेत्रों को मुसलिम नेताओं के जरिए अपने पुराने वोट बैंक को अपने पाले में खींचने की हरसंभव कोशिश कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक मुंबई के अबू आसिम आजमी, पसमांदा मुसलिम समाज के अनीस मंसूरी व अनेक विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय होने को कहा गया है। कई इलाकों का दौरा कर चुके एक मुसलिम नेता ने कहा कि ‘अन्य क्षेत्रों की तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में भी सपा को लेकर उत्साह है पर किसी अन्य बिरादरी का एकमुश्त वोट मुखर न होने के कारण वह असमंजस में है। अगर अपने प्रयासों से हम इस असमंजस की स्थिति को तोड़ पाए तो नतीजे बहुत निराशानजक नहीं होंगे।’
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