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न्यूनतम पेंशन तय करने पर नहीं बनी सहमति

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो।
Story Update : Thursday, February 23, 2012    4:42 AM
Agreed not to fix the minimum pension

कर्मचारी भविष्य निधि कोष के अंशदाताओं के लिए न्यूनतम एक हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन तय करने के एजेंडे पर बुधवार को केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका। सीबीटी आगामी बैठक में इस बारे में कोई निर्णय लेगा।

एक समिति गठित करने का निर्णय
सूत्रों के मुताबिक 4.72 करोड़ लोगों को लाभ पहुंचाने वाले इस प्रस्ताव पर यूनियन लीडर और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों द्वारा अतिरिक्त बोझ लेने के लिए तैयार नहीं होने के कारण सहमति नहीं बन सकी। बोर्ड की बैठक बाद संवाददाताओं से बात करते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस प्रस्ताव को लागू करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति अपनी रिपोर्ट एक माह के अंदर सौंप देगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

पांच सौ रुपये से भी कम पेंशन मिलती है
सीबीटी की बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के वार्षिक आर्थिक चिट्ठे पर बोर्ड ने अपनी मुहर लगा दी है। लेकिन भविष्य निधि अंशदाताओं के लिए बैंक पासबुक की तरह कांट्रीब्यूशन कार्ड जारी करने के प्रस्ताव पर बोर्ड ने आम सहमति नहीं बन पाई। माना जा रहा है कि बोर्ड की आगामी बैठक में इस पर फिर से चर्चा हो सकती है। गौरतलब है कि ईपीएफओ के अंशधारकों में से करीब 14 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें पांच सौ रुपये से भी कम पेंशन मिलती है। जबकि लगभग सात लाख लोगों को एक हजार रुपये बतौर पेंशन राशि मिल पाते हैं।


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