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वीजा मसले पर भारत के आगे इसलिए झुका अमेरिका

विनीता वशिष्ठ
Story Update : Sunday, February 05, 2012    7:27 AM
US changing visa rules to attract highly skilled india

अमेरिका ने कहा है कि वो भारत के आईटी, विज्ञान और इंजीनियरिंग पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए एफ-1 और एच-1बी वीजा नियमों में बदलाव करने को तैयार है। अमेरिका के इस फैसले को वीजा विवाद पर भारतीय पक्ष की जीत के रूप में देखा जा रहा है। वीजा नियम आसान होते ही भारतीय आईटी पेशेवरों का अमेरिका जाना सुगम हो जाएगा। सवाल उठ रहा है कि आउटसोर्सिंग नीति से परेशान होने वाले ओबामा आखिरकार क्यों अपने मुल्क में इनसोर्सिंग की प्रक्रिया को तेज करना चाह रहे हैं। आखिर क्यों अमेरिका भारतीय पेशेवरों को अपने मुल्क में वापस लाने के लिए बैचेन है।

1. महंगे पेशेवरों से परेशान अमेरिका
दरअसल मंदी की मार से जूझ रही अमेरिकी कंपनियों के पास इतना पैसा नहीं है कि वो अपने उच्च पेशेवरों की जरूरत पूरी कर सके। ऐसे में कंपनियां ऐसे बाहरी पेशेवरों को लाना चाहती हैं जो अमेरिकियों से कम तन्ख्वाह में काम कर सके। अमेरिकी तकनीकी पेशेवर अपने देश में कम कीमत पर काम करना नहीं चाह रहे। मोर्गेज संकट के बाद बैंक भी फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं। वो कंपनियां जो बाहरी पेशेवरों से काम करा रही है, उन पर विश्वास करके लोन तो दिया जा सकता है लेकिन स्थानीय पेशेवरों के कंधों पर टिकी कंपनियों का भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आ रहा है।

2. बिन भारत सब सून
अमेरिका में आर्थिक संकट के पिछले दो साल भारतीय पेशेवरों की कम संख्या ये बताने के लिए काफी है कि बिना भारतीय पेशेवरों के अमेरिका का आर्थिक विकास उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा जितना होना चाहिए। अमेरिका ने जब एच1बी की फीस में बढ़ोतरी की और नियम कड़े किए तब भारतीय पेशेवरों की संख्या अमेरिका में सबसे ज्यादा थी। अमेरिका ने मेक्सिको सीमा और स्थानीय रोजगार का बहाना बनाकर वीजा नियम कड़े कर दिए जिससे दो साल में भारतीय पेशेवरों की संख्या में 20 फीसदी गिरावट आई। अनुभवी पेशेवरों की कमी से अमेरिका की कंपनियां दिवालिया होने लगी। ये सभी वो कंपनियां थी जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में और राजस्व वसूली के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसे में अपनी कंपनियों के दबाव में आकर ही अमेरिका वीजा नियमों में ढील देने को राजी हुआ है।

3. ग्रीन कार्ड धारकों की भूमिका
अमेरिका में ग्रीन कार्ड धारकों की भूमिका ने भी अमेरिका को वीजा नियम ढीले करने पर मजबूर किया। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में ग्रीन कार्ड धारकों की लॉबी भी सक्रिय हो उठती है। आप जानते ही होंगे कि अमेरिका में ग्रीन कार्ड धारकों को अपना व्वसाय करने या निगम बनाने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में अमेरिका के कुल ग्रीन कार्ड धारकों में भारतीय दूसरे नंबर पर है। ये भारतीय अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था में बहुत अहम रोल निभा रहे हैं। सरकारी फैसलों और नीतियों को प्रभावित करने में समक्ष भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों की लॉबी को ओबामा पहचानते हैं। इसी कारण ओबामा ने ऐन राष्ट्रपति चुनाव से पहले वीजा नियमों में ढील देने का फैसला किया है ताकि भारतीय पक्ष उनके प्रति समर्थित मुद्रा में रहे।

4. आउटसोर्सिंग की खिलाफत पड़ी भारी
हाल ही में आउटसोर्सिंग की खिलाफत करना अमेरिका के लिए भारी पड़ गई है। अमेरिका ने आउटसोर्सिंग पर बाहरी देशों में जा रहे अपने कामगारों को रोक तो लिया है लेकिन उन कामगारों को उनके स्तर की नौकरी दे पाना अमेरिका को महंगा साबित हो रहा है। दूसरी तरफ भारत में आउटसोर्सिंग करके अमेरिका पैसा भेज रही अमेरिकी कंपनियों ने भी अमेरिका पर दबाव बनाया है कि अगर अमेरिका को ज्यादा लाभ चाहिए तो वो अमेरिका में भी ज्यादा भारतीय पेशेवरों को आने दे। इससे आउटसोर्सिंग का संतुलन बना रहेगा और अमेरिका को महंगे पेशेवरों को ढोना नहीं पड़ेगा।

5. कूटनीतिक और राजनीतिक दबाव
इसके कुछ दूसरे कूटनीतिक और राजनीतिक कारण भी है। जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव नजदीक होना। चीन के साथ अमेरिका का तनाव और दक्षिण ‌एशिया में अमेरिका को एकमात्र भारत का सहयोग। इन सभी कारणों से अमेरिका भारत के साथ अपने संबंध खराब करना नहीं चाहता है। इसलिए वो भारत की वीजा नियमों पर उठी आपत्तियों को दूर करने पर राजी हो गया है।


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KHILAFAT - is a wrong word... the correct one is "MUKHALFAT"
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US'companies of reatil sector were lobbied Obama administration to pursue indain govt to open their retail sectors. This is a strategic decession of US to give more VISA to indian workers. So that they can negotiate and bargain on the table in favour of US companies.
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