टूजी मामले में निचली अदालत के शनिवार के फैसले से जहां गृह मंत्री पी. चिदंबरम को राहत मिली है वहीं, कांग्रेस को यूपीए के घटक दलों के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल हो गई है। टूजी घोटाले में अपनी संलिप्ता के आरोपों की वजह से अभी तक अपराध बोध से ग्रस्त कांग्रेस को कोर्ट ने इस स्थिति से बाहर निकलने का मौका दे दिया है। ऐसे में अब कांग्रेस बढ़े हुए मनोबल और उत्साह के साथ पेश आएगी और गठबंधन की आंतरिक सियासत में घटक दलों को हावी नहीं होने देगी।
जानकारों की माने तो टूजी मामले में द्रमुक के साथ कठघरे में खड़ी की जा रही कांग्रेस को तृणमूल कांग्रेस और राकांपा जैसी पार्टियां इस अपराध बोध का एहसास कराने का कोई मौका नहीं चूकती थीं। यूपीए में सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने में जुटी रहने वाली इन पार्टियों ने अपनी इस रणनीति को परवान चढ़ाने का यह तरीका भी निकाला हुआ था। कभी परोक्ष रूप से तो कभी सीधे ही घोटालों और उनकी जांच में ढिलाई के लिए कांग्रेस पर तोहमत डालने से तृणमूल नेता ममता बनर्जी चूकती नहीं थीं। जानकारों का कहना है कि अब जबकि कोर्ट ने चिदंबरम को राजा के साथ सहआरोपी बनाने से इनकार कर दिया है तो निश्चित तौर पर इससे बढ़ा कांग्रेस का मनोबल यूपीए में भी नजर आएगा।
यूपीए की आगामी बैठकों में कांग्रेस के वापस लौटे इस आत्मविश्वास से तृणमूल और राकांपा जैसे सहयोगी दल जरूर रूबरू होंगे। नैतिकता के पैमाने पर खुद को बेहतर साबित करने का हर मौका इस्तेमाल करने वाली ममता बनर्जी को कांग्रेस न्यायपालिका से हासिल हुए मनोवैज्ञानिक बढ़त से दबाने में की पूरी कोशिश करेगी।
वहीं, इस पूरे मामले में अलग-थलग पड़ती नजर आ रही द्रमुक को विश्वास में लेने की चुनौती भी कांग्रेस पर होगी। विश्लेषकों का मानना है कि टूजी घोटाले पर चिंदबरम को मिली राहत के बाद द्रमुक और कांग्रेस के बीच अगर मतभेद पनपे तो इसका फायदा भी दूसरे सहयोगी दल उठाएंगे। यही वजह है कि दक्षिणी के अपने सहयोगी को भरोसे में लेकर चलने की कांग्रेस और सरकार की पूरी कोशिश होगी। घोटाले का पूरा ठीकरा राजा पर फोड़ने के बावजूद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल इसी वजह से द्रमुक को अपना अहम सहयोगी करार देना नहीं भूले थे।
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