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इसी माह वतन लौटेंगे शारजाह में फंसे भारतीय! |
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| हलवारा (लुधियाना)। |
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| Story Update : Thursday, February 09, 2012 8:07 AM |
पाकिस्तानी नागरिक की हत्या के मामले में आठ करोड़ (पाकिस्तानी मुद्रा) की ब्लड मनी देने के बाद फांसी से बचे 17 भारतीयों को शारजाह की निचली अदालत ने अवैध रूप से शराब बेचने और पीने के आरोप में छह माह की सजा सुनाकर मामले को खत्म कर दिया है। लेकिन युवक पहले ही करीब तीन साल की सजा काट चुके हैं। इसलिए सभी युवकों के फरवरी के अंत तक वतन लौटने की उम्मीद है। हालांकि इस मामले में घायल दो नागरिकों के मुआवजे के मामले में सिविल अदालत 15 फरवरी को कार्रवाई करेगी।
आपराधिक धाराओं से मुक्त मामले की बुधवार को अंतिम सुनवाई करते हुए तीन जजों मोहम्मद अल करनावी, मोहम्मद अल फतेह एवं अब्दुल रहीम अल फील ने छह माह की सजा सुनाकर युवकों को सभी आपराधिक धाराओं से मुक्त कर दिया। शारजाह अपील अदालत में आपराधिक मामलों की सुनवाई के बाद ओबराय ने अमर उजाला को टेलीफोन पर बताया कि सभी युवक तीन साल से अधिक की सजा काट चुके हैं।
संभावित रकम का इंतजाम आपराधिक मामलों में पहले दो साल और अब छह माह की सजा से अधिक सजा सभी युवक काट चुके हैं। यदि सिविल याचिका की सुनवाई पूरी हो गई होती तो आज ही सभी युवकों की रिहाई संभव थी। अब 15 फरवरी को सिविल अदालत मुआवजे की रकम निर्धारित करने के लिए डाक्टरों की टीम गठित करेगी। यह टीम मुश्ताक अहमद और उसके भाई शाहिद इकबाल को घटना के समय लगी चोटों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सिविल अदालत को देगी। इसमें ज्यादा से ज्यादा से दस से 12 दिन का समय लग सकता है।
रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत जो मुआवजा तय करेगी उसकी अदायगी युवकों को करनी होगी। ओबराय ने कहा कि मुआवजे के लिए संभावित रकम का इंतजाम हो गया है। ओबराय ने सभी युवकों के परिजनों को भरोसा दिलाया कि फरवरी के अंत तक सभी युवक अपनी सरजमीं पर होंगे। सभी को अपने साथ लेकर ओबराय खुद भारत आएंगे।
यूं फंसा था मामला दुबई स्थित होटल व्यवसायी एसपीएस ओबराय द्वारा 27 जुलाई 2011 को मृतक पाकिस्तानी नागरिक मिश्री खान के परिवार को आठ करोड़ पाकिस्तानी रुपये अदा कर दिए थे। इसके बाद 12 सितंबर को अदालत ने राजीनामा कबूल करते हुए भारतीयों को दो साल की सजा सुनाई थी। 21 सितंबर को सभी भारतीयों को सेंट्रल जेल से निकाल कर सब-जेल भेज दिया गया था। एसपीएस ओबराय के सहयोग से भारतीय दूतावास ने सभी युवकों को 23 सितंबर भारत भेजने की तैयारियां पूरी कर ली थीं। इसी दौरान 18 सितंबर को अदालत के फैसले में तबदीली के चलते सभी युवकों की वतन वापसी रुक गई थी और उन्हें दोबारा सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट में इन सभी भारतीयों के खिलाफ अवैध शराब रखने और पीने की सुनवाई निचली अदालत को भेज दी थी।
मुआवजे के लिए भी याचिका इसी दौरान मुकदमे के मुख्य गवाह और मिश्री खान के साथ घायल हुए मुश्ताक अहमद और उनके भाई शाहिद इकबाल ने भी सिविल अदालत में मुआवजे के लिए याचिका दायर कर दी थी।
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