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अलगाववादियों से वार्ता का द्वार बंद नहीं करेगा केंद्र |
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| टी. ब्रजेश |
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| Story Update : Saturday, September 11, 2010 1:06 AM |
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के साथ सख्ती का संकेत दे रही केंद्र सरकार उनके साथ वार्ता के दरवाजे बंद नहीं करना चाहती। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए सियासी नुस्खा तैयार कर रही केंद्र सरकार अलगाववादियों को वार्ता की मेज पर लाने की ताजा कोशिश शुरू करने की भी तैयारी में है। कश्मीर की जनता के लिए राहत पैकेज को अंतिम रूप देने में जुटा केंद्र यह संदेश देना भी जरूरी मान रहा है कि उसकी हर पहल को सूबे में आवाम की स्वीकार्यता मिल रही है।
अर्थात केंद्र सरकार उन पर कोई भी फैसला थोप नहीं रही है। इसके लिए जनता के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का विकल्प खोलकर चलना अनिवार्य होगा। चाहे यह अलगाववादी संगठन के ही नेता क्यों न हों। यही वजह है कि गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने लगातार यह कहा है कि वार्ता के लिए उनके दरवाजे खुले हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार सूबे की समस्या हल करने के लिए हर गुट से बातचीत को तैयार है। जाहिर है उनका इशारा अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की ओर भी था।
सूत्रों के अनुसार अलगाववादियों को सरकार वार्ता की मेज पर लाने में और ज्यादा दिलचस्पी लेने जा रही है। इसके पीछे सरकार की सोच यह है कि वार्ता की उसकी पेशकश को ठुकराकर अलगाववादी नेता सूबे की जनता को नाखुश कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के जरिए सरकार को पता चला है कि कश्मीर में हिंसा से त्रस्त जनता केंद्र से बातचीत के विकल्प की हिमायत कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार राजनीतिक प्रतिनिधियों के जरिए जनता के बीच यह संदेश देना चाहती है कि अलगाववादी नेता समस्या को हल ही नहीं होने देना चाहते। वार्ता से उनके दूर भागने की वजह भी यही है।
बातचीत के टेबल पर सूबे की समस्या पर सारी तस्वीर साफ होने का डर उन्हें इस कवायद से दूर भागने पर विवश करता है। सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर सरकार की मदद से केंद्र यह संदेश जनता के बीच पहुंचाना चाहता है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि युवकों की दिशा और दशा सुधारने के केंद्र के पैकेज का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोग अलगाववादियों को इस मामले में रोड़ा मानना शुरू कर दें।
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