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घटते जंगल से संकट में ग्रीन इंडिया मिशन |
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| नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो। |
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| Story Update : Wednesday, February 08, 2012 4:34 AM |
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत 2020 तक देश के वन क्षेत्र को 33 फीसदी तक बढ़ाने का सपना देख रहे लोगों के लिए निराशाजनक खबर है। पिछले दो वर्षों के दौरान देशभर में 367 वर्ग किलोमीटर जंगल कम हो गए हैं। वन क्षेत्र में कमी की एक वजह माओवादियों द्वारा जंगलों का अवैध कटाई भी शामिल है।
अकेले आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में माओवादियों के इस गोरखधंधे से 182 वर्ग किमी जंगल खत्म हो गया। केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय की तैयार भारत वन रिपोर्ट-2011 में इसका खुलासा हुआ है। वन क्षेत्र बढ़ाने के मामले में पंजाब सबसे आगे है जबकि सबसे ज्यादा वन क्षेत्र गंवाने वालों में आंध्र प्रदेश रहा है। खास बात यह है कि दोनों ही राज्यों में यूकेलिप्टस के पेड़ों की भूमिका रही।
पंजाब में जहां यूकेलिप्टस के पेड़ लगाने से सौ वर्ग किमी वन क्षेत्र का इजाफा हुआ तो दूसरी ओर आंध्र प्रदेश ने पुराने यूकेलिप्टस के पेड़ कटने से बड़ा वन क्षेत्र गंवा दिया। रिपोर्ट जारी करते हुए पर्यावरण व वन मंत्रालय के सचिव टी. चटर्जी ने माना कि आंध्र प्रदेश में जंगल घटने के लिए माओवादी भी जिम्मेदार रहे हैं। माओवादी गांव वालों से जंगल कटवाते रहे हैं। यह मामला जमीन को हड़पने से भी जुड़ा है।
जंगलों की स्थिति को लेकर इससे पहले 2009 में रिपोर्ट आई थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में एक दशक के दौरान प्रतिवर्ष तीन लाख हेक्टेयर की दर से वन क्षेत्र में इजाफा हुआ है लेकिन ताजा रिपोर्ट में पाया गया गया है कि 2009 की तुलना में वन क्षेत्र 367 वर्ग किमी घट गया। हालांकि चटर्जी की दलील है कि घने और मध्यम क्षेत्र के वनों का विस्तार हुआ है। चटर्जी ने माना कि यही स्थिति रही तो देश के वन क्षेत्र को 33 फीसदी तक बढ़ा पाना संभव नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया हर दो साल में वन क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार करता है। रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल 7.82 करोड़ हेक्टेयर भूमि में जंगल हैं जो कि कुल क्षेत्रफल का 23.81 फीसदी है। देश के 15 राज्यों में वन क्षेत्र का इजाफा हुआ जबकि 12 राज्यों में घटा है। आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। इसकी वजह झूमिंग खेती बताई जा रही है। उत्तरी राज्यों में उत्तर प्रदेश में तीन वर्ग किमी की कमी पाई गई जबकि जम्मू-कश्मीर में दो, हिमाचल प्रदेश में 11, हरियाणा में 14 और उत्तराखंड में मात्र एक वर्ग किमी क्षेत्र बढ़ा। दिल्ली और चंडीगढ़ में वन क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं हुआ।
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