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ब्रेस्टफीडिंग से स्लिम रहती है मां

Priyanka Padlikar

Priyanka Padlikar

Updated Fri, 03 Aug 2012 05:30 PM IST
 breast feeding keep mothers slim
अगर आपको भी अधिक उम्र में भी छरहरी दिखने वाली महिलाओं को देखकर रश्क होता है तो यह जानकारी आपको जरूरी भाएगी। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार, जो महिलाएं अपने बच्चों को छह महीनों तक अपना दूध पिलाती हैं वे लंबे समय तक स्लिम रहती हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रसव के कुछ महीनों तक शिशु को अपना दूध पिलाने वाली महिलाओं में अगले 30 सालों तक मोटापा न होने की संभावना अधिक होती है। 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी' में प्रकाशित हुए इस शोध में 7,40,600 महिलाओं का अध्ययन किया गया।

शोधकर्ता डॉ. क्रिस्टी बैब्रो के अनुसार, 'हम सभी अब तक ब्रेस्ट फीडिंग को बच्चे की सेहत से जोड़कर देखते थे लेकिन इस शोध से साबित हुआ है कि यह मां की सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं।'   

ब्रेस्टफीडिंग और वेट लॉस
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के बढ़ने वाले वजन को घटाने में ब्रेस्ट फीडिंग के फायदे पहले भी कई शोधों में साबित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान शरीर से अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है जो एक दिन में 500 कैलोरी बर्न होने के बराबर है।

कम होता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

कई शोधों में यह साबित हो चुका है कि जो महिलाएं अपने बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जितने लंबे समय तक महिलाएं बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क उतना ही कम होता है।

ओवरी के कैंसर की घटती है आशंका
कई अध्ययनों में माना गया है कि जब मां अपने बच्चे को दूध पिलाती है तो उस दौरान मैं में एस्ट्रोजेन नामक हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्रोजेन की कमी से यूट्रेस के टिशु की क्षतिपूर्ति होती है जिससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है।

नहीं होता आस्टिओपरोसिस
कई शोधों में माना गया है कि जो महिलाएं अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड नहीं कराती हैं उनमें  आस्टिओपरोसिस नामक बीमारी का आशंका अधिक होती है। आस्टिओपरोसिस हड्डियों का वह रोग है जिसमें फ्रैक्चर की आशंका अधिक रहती है। महिलाओं को मैनोपॉज के बाद इस बीमारी की आशंका अधिक रहती है।
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