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William Wordsworth on small girl child

विश्व काव्य

विलियम वर्ड्सवर्थ: नन्हीं मासूम कली

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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विलियम वर्ड्सवर्थ का जन्म अप्रैल 1770, कौकरमाउथ, कंबरलैंड, इंग्लैंड में हुआ। निधन 23 अप्रैल 1850 को हुआ। 

प्रमुख कृतियां- साईमन ली, वी आर सेवन, लाईंस रिटन इन अर्ली स्प्रिगं, लाईंस क्म्पोस्ड अ फ्यू माइल्स अबव टिंटर्न ऐबे, ओड टू ड्यूटी, द सोलिटरी रीपर, लंदन 1802, वर्ल्ड इज टू मच वित अस, माई हार्ट लीप्स अप, डैफोडिल्स (आई वांडर्ड लोनली ऐज अ चाईल्ड), द प्रेल्यूड, गाईड टू द लेक्स

विलियम वर्ड्सवर्थ

नन्हीं मासूम कली 

सूरज की किरणों और भीगी फुहारों में

खिलती रही एक कली बीते तीन बरसों में

आतुर प्रकृति ने कहा - प्रेम के आवेग में

नहीं खिला कोई फूल मेरी सूनी गोद में

निसर्ग के नियम और सदा संवेगों के संग

उस मासूम में खिलेंगे प्रेम के अगणित रंग

चंचल चितवन चहकेगी मेरे संग-संग

पर्वतों, पहाड़ियों और पसरे मैदानों पर

निकुंज और वनों की सर्पिल पगडंडियों पर

धरती और स्वर्ग पर... धरती और स्वर्ग पर

महसूस करेगी वह एक आत्मस्फूर्ति

और अंतर्चेतना - प्रज्ज्वलन पर शमन

कुलांचें भरेगी वह मृग शावक बनकर

आनंदित होती है जो हरीतिमा देखकर

या, पगडंडियों से रिसते झरनों से

और बन जाएगी वृक्ष सुगंधित सा

मन होगा उसका शांत और गंभीर

मौन, स्पंदित सजीवों की तरह

कपसीले गुच्छों जैसे सारे मेघ समूह

लेकर आएंगे उसके लिए धुनकनी

आंधी, बवंडर और तूफान में भी

देखना वह नहीं होगी विफल

वह लावण्य जो उसे बनाकर देगा

यौवना... प्रकृति की ईश्वरीय अनुकंपा से

मध्य रात्रि के सितारे होंगे उसके प्रिय

कान लगाकर सुनेगी वह अनेकों बार

जहां नदियां करती होंगी उन्मुक्त नर्तन

प्रतिबिंब होंगे... अनचीन्हे, अबूझ

संगीत के सुर जो सजेंगे लहरों से!

तब एकाकार होंगी उसके कांतिवान चेहरे पर

उमंग और उल्लास की जीवंत संवेदनाएं।

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