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Unstoppable- My Life So Far written by tennis star ,maria sharapova

विश्व काव्य

सात सौ डॉलर लेकर अमेरिका

कल्लोल चक्रवर्ती

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अपनी प्रतिभा, सौंदर्य और व्यावसायिक सफलता के कारण मारिया शारापोवा विश्व टेनिस में अलग मुकाम रखती हैं। शारापोवा की कहानी इसलिए भी ध्यान खींचती है कि करियर के दो जबर्दस्त झटके भी उन्हें विचलित नहीं कर पाए। कंधे की चोट के बाद थोड़े समय वह कोर्ट से बाहर रहीं। तब अनेक लोगों ने उनके खेल करियर के अंत की भविष्यवाणी कर दी थी, लेकिन सर्जरी के बाद शारापोवा न सिर्फ कोर्ट में लौटीं, बल्कि उन्होंने ग्रैंड स्लैम भी जीते।

अलबत्ता डोप टेस्ट में पकड़े जाने का दूसरा झटका ज्यादा बड़ा है और इसने कमोबेश उनकी छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। यह शारोपोवा की जीवन शक्ति ही है कि प्रतिबंधित दवा के सेवन के मामले में ज्यूरी के सामने उन्होंने दमदार तरीके से अपना पक्ष रखा। इसके बावजूद यह ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता कि पंद्रह महीने के प्रतिबंध के बाद टेनिस कोर्ट में लौटकर अपनी सफलता की कहानियां वह कितनी दूर तक जारी रख पाएंगी। शारापोवा की आत्मकथा वस्तुतः उनके संन्यास लेने के समय जारी होने वाली थी, लेकिन अब यह डोप टेस्ट में पकड़े जाने पर उनकी निर्दोषिता बताने के लिए हमारे सामने है। हालांकि डोपिंग मामले में फंसना शारापोवा की लापरवाही का उदाहरण ही ज्यादा है, क्योंकि उन्हें इसका पता ही नहीं था कि जिस दवा का सेवन वह लंबे समय से कर रही थीं, उसे प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है।

यह किताब शारापोवा के संघर्ष के बारे में बताती है। बेलारूस में जब वह अपनी मां के गर्भ में थी, तभी चेर्नोबिल हादसा हुआ था, जिस कारण उनका परिवार सोची में बस गया। पिता यूरी को किसी ने टेनिस का एक रैकेट दिया था, तो वह टेनिस खेलने लगे। नन्ही शारापोवा पिता के साथ खेलती। गरीबी इतनी थी कि उसे दूसरों की चीज इस्तेमाल करनी पड़ी, चाहे चार साल की उम्र में हाथ आया बड़े आदमी का रैकेट हो या अमेरिका में ट्रेनिंग के वक्त हमवतन अन्ना कुर्निकोवा की उतरन हो। कुछ साल बाद उन्हीं कुर्निकोवा को शारापोवा ने बहुत पीछे छोड़ दिया। मार्टिना नवरातिलोवा ने शारापोवा की प्रतिभा देखकर उसे अमेरिका जाने की सलाह दी थी। उसी से यूरी की दुनिया बदल गई। सात सौ डॉलर लेकर शारापोवा के सपनों को साकार करने वह अमेरिका चले आए।

संघर्ष ने शारापोवा को शिखर पर पहुंचाया। सबसे कम उम्र में विंबलडन जीतने वाली तीन खिलाड़ियों में शारापोवा शुमार हैं, तो सबसे कम उम्र में ऑस्ट्रेलियन ओपन जूनियर टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। अलबत्ता यह किताब शारापोवा की कई मानसिक ग्रंथियों के बारे में भी बताती है। एक तो साथी खिलाड़ियों के प्रति उनके रूखेपन का तर्क गले नहीं उतरता। वह मानती हैं कि साथी खिलाड़ियों से मेलजोल बढ़ाया, तो कोर्ट पर मुकाबला दमदार नहीं रह जाएगा। यह बहुत अजीब तर्क है। हमारे यहां सचिन जैसे दिग्गज क्रिकेटर ने हमेशा विपक्षी खिलाड़ियों से बेहतर रिश्ते रखे, पर उसका उनके खेल पर कोई असर नहीं हुआ।

इसी तरह सेरेना विलियम्स के प्रति जगह-जगह शारापोवा ने जिस रवैये का परिचय दिया है, वह उनकी कुंठा का ही उदाहरण है। विंबलडान के फाइनल में शारापोवा से हारने पर सेरेना लॉकर रूम में रो रही थीं, इसका जिक्र किताब में कई बार है, पर कुल इक्कीस मैचों में शारापोवा उन्नीस बार सेरेना से पराजित हुई हैं,  जिसका जिक्र पुस्तक में नहीं है! शारापोवा के इस दावे में भी दम नहीं है कि ऑपरेशन के बाद उनका खेल पहले जैसा नहीं रहने के कारण ही सेरेना लगातार चैंपियन बनी हुई हैं।

दरअसल, शारापोवा की अलोकप्रियता के कारण ही उन पर लगे प्रतिबंध का अनेक खिलाड़ियों ने स्वागत किया है। जॉन मैकनरो भी शारापोवा के इस दावे को सच नहीं मानते कि उन्होंने प्रतिबंधित मेलडोनियम का सेवन गलती से किया है। शारापोवा की प्रेरणा मार्टिना नवरातिलोवा ने भी उन्हें कोर्ट में लौटने के बाद थोड़ा शालीन और मिलनसार होने की सलाह दी है। कुल मिलाकर टेनिस प्रेमियों को शारोपावा की तीसरी पारी का बेसब्री से इंतजार है।

किताब-अनस्टॉपेबल-माई लाइफ सो फार
लेखक - मारिया शारोपावा 
प्रकाशन - पेंगुइन रेंडम हाउस
मूल्य - 699 रुपये

साभार: मनोरंजन डेस्क/ अमर उजाला
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