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poem of walt whitman i hear america singing

विश्व काव्य

वाल्ट व्हिटमन: सुन रहा हूँ गा रहा है अमेरिका

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अमेरिकी कविता के आदि-पुरुष कहे जाने वाले वाल्ट व्हिटमन का जन्म 31 मई, 1819 को न्यूयॉर्क को हुआ था। वाल्ट अपने मां-बार की नौ संतानों में दूसरे थे। दरअसल उनका नाम वाल्टर व्हिटमन था, लेकिन उनके पिता उन्हें वाल्ट कहकह पुकारते थे और बाद में वाल्ट ने अपने लिए यही नाम चुना। 

सुन रहा हूं गा रहा है अमेरिका, 
और उसके गीत के स्वर विविध हैं,
गीत सुनता मिस्त्रियों के, 
गा रहा हर एक अपना गीत स्वर में उचित लाघव और बल के साथ,
पटरे या कड़ी को नापता बढ़ई, गा रहा है गीत अपने,
गा रहा है राज अपना गीत काम की तैयरियां करता हुआ या काम से जब छूटता है,
नाव में गा रहा है गीत माझी उसे लेकर नाव में जो कुछ पड़ा, उसका, अग्निबोटों की
  डेकों पर गा रहा है डेक का मज़दूर,
अपनी बेंच पर बैठा हुआ गा रहा मोची, 
टोपियों वाला खड़ा होते हुए
गा रहा है लकड़हारा, खेत पर जाते हुए,
 गा रहा है युवा हलवाहा, प्रातःकाल अपनी
राह पर, दोपहर में जब मिला अवकाश या हुई जब शाम,
गा रही है मां सुरीली लोरियां,
गा रही है कार्य में रत नववधू, 
वस्त्र सीते और धोते हुए गा रही है बालिका,
गा रहा है प्रत्येक अपना गीत-प्रत्येक नर-नारी, अपने गीत, अन्यों के नहीं,
दिन के गीत दिन में चल रहे-और टोली रात में ऋजु, सुहद, युवकों की,
गा रहे मुंह खोल कर ऊंचे सुरों में मधुर अपने गीत

- वाल्ट व्हिटमन

अनुवाद :  चंद्रबली सिंह

साभार- वाणी प्रकाशन से प्रकाशित, वाल्ट व्हिटमन के संचयन 'घास की पत्तियां' से। 
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