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ajandek wagner poems on lover departs
विश्व काव्य

ज़्देन्येक वागनेर: चली जाओ अगर तुम जाना चाहती हो...

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017
चेक कविता

चली जाओ

-ज़्देन्येक वागनेर-



चली जाओ
अगर तुम जाना चाहती हो

वहां तक
जहां से व्योम-गंगा बहती है।

तुम्हारी आंखों की
चमकीली तारिकाएं
मेरे दिल में से तो

कभी ग़ायब न होंगी।
 
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