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viral shayari on social media first august

वायरल

वायरल शायरी : ज़िंदगी के तीन रंग...

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वाह री ज़िंदगी 

जीवन की आधी उम्र तक पैसा कमाया,
पैसा कमाने में इस शरीर को खराब कीया।
बाकी आधी उम्र तक उसी पैसे को,
शरीर ठीक करने में लगाया।
न शरीर बचा, न पैसा ।

वाह री ज़िंदगी 

इंसान नीचे बैठा दौलत गिनता है 
कल इतनी थी..आज इतनी बढ़ गयी.. 
ऊपर वाला हंसता है और इंसान की सांसे गिनता है, 
कल इतनी थीं..आज कम हो गयीं..!!

वाह री ज़िंदगी 

दौलत की भूख एेसी लगी कि कमाने निकल गए!
जब दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए!
बच्चों के साथ रहने की फुरसत ना मिल सकी!
फुरसत मिली तो बच्चे कमाने निकल गए!

वाह री ज़िंदगी 


(ये शायरी सोशल मीडिया में लोकप्रिय है। अगर आपको इनके लेखक का नाम मालूम हो तो साझा करें। शायरी के साथ शायर का नाम लिखने में हमें ख़ुशी होगी।)
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