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मुड़ मुड़ के देखता हूं

ज़माना

Prince Amrit

3 कविताएं

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ना हिन्दू होता है ना मुसलमान होता है
पैदा तो हर कोई इंसान होता है
बस हम जैसे लोग ही एक फर्क बना देते हैं
क्या कोई पैदा होते ही बेईमान होता है ?

इस जमाने के लोग ऐसी बात बना देते हैं
खुद के लाशों की एक घाट बना लेते हैं
इनमे बेईमानी तो ऐसे कूट कूट के भारी होती है
कि अपने बच्चों को भी अपना बाप बना लेते हैं।

बेईमानी के ऐसे दलदल में डूबा ये जमाना है
ये तो अपने ही घर का लूटते खजाना हैं
जब अपने ही बच्चे बुढ़ापे में गाली और लात देते हैं
तो बोलते हाय हाय क्या जमाना है।

- प्रिंस अमृत

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