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famous hindi poet vishwanath tripathi in amar ujala baithak on amitabh bachchan

मुड़ मुड़ के देखता हूं

कुलभूषण खरबंदा शालीन थे, अमिताभ बच्चन शरारती थेः विश्वनाथ त्रिपाठी 

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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मशहूर साहित्यकार विश्वनाथ त्रिपाठी का कहना है कि दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में उनके शिष्यों में कई उन्हें ख़ासतौर पर याद हैं। कुलभूषण खरबंदा तो बहुत शालीन स्टूडेंट थे लेकिन ‌अमिताभ बहुत शरारती थे। अमिताभ की आवाज़ प्रभावशाली थी और उनकी आंखें बोलती थीं। 

आलोचना और साहित्य के सबसे बड़े नामों में शुमार होने वाले त्रिपाठी जी ने मंगलवार को अमर उजाला बैठक संवाद की अगली कड़ी में अमर उजाला परिवार के संपादकों से बातचीत की। बढ़ती आयु और सेहत की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने ग़ज़ब की याददाश्त दर्ज कराई और अनेक समसामयिक मुद्दों पर अपनी राय ज़ाहिर की। 

इस आत्मीय बातचीत में वह हर तरह के सवालों के जवाब देते रहे। साहित्य पर वह बोले। संस्कृति पर बोले। राजनीति पर बात की। कॉलेज में पढ़ाने के वर्षों के अनुभव को सामने रखा। कुछ छात्रों को याद किया और अपने कुछ शिक्षकों की स्मृति को भी वह अमर उजाला के संपादकीय सहयोगी के बीच लेकर आए। 

उन्होंने देश के विकास की दशा दिशा पर कहा, "देश सबका है और देश के विकास को दलगत विभाजन से अलग देखना चाहिए, इससे लोकतंत्र का आधार बढ़ता है।" उनके लिए देश के विकास का मतलब शिक्षा की मज़बूत स्थिति से भी था, "शिक्षकों की नियुक्ति में अगर हम पारदर्शिता न रख पाएं तो तय है हमारी दिशा विकास की ओर तो कतई नहीं होगी। अच्छे शिक्षक समाज की ज़रूरत होते हैं।" 

हिंदी साहित्य में आलोचना की परंपरा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नामवर सिंह से मेरे बड़े आत्मीय रिश्ते रहे हैं, लेकिन मैं रामविलास शर्मा को उनसे कहीं बड़ा आलोचक मानता हूं, और इन दोनों से बड़े आलोचक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी थे, जो मेरे और नामवर जी के भी गुरु रहे। 

बातचीत के लंबे दौर में डॉ. विश्नाथ त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी कहानी के विशाल भंडार में उन्हें प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह', फणिश्वरनाथ रेणु की 'मारे गए गुलफाम', अमरकांत की 'डिप्टी कलक्टर', और कृष्णा सोबती की 'मित्रो मरजानी' बहुत पसंद हैं। 
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