आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

Home›  kavya›  Mud Mud Ke Dekhta Hu

कवियों-शायरों और उनकी रचनाओं से जुड़े यादगार किस्से-संस्मरण-आपबीती

जब कमाल अमरोही बोले...मुझे नौशाद हो गया 

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017

पाकीज़ा बनाने के दौरान कमाल अमरोही ने नौशाद साहब की कई विशेषताओं को नज़दीकी से परखा और जाना-समझा, इसके बाद उन्होंने नौशाद की तारीफ़ में क़सीदे भी गढ़े।

लीलाधर जगूड़ी: कविता को दिया नया आयाम 

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017

कविता को नया रूप देने में लीलाधर जगूड़ी का कोई सानी नहीं है। जगूड़ी ऐसे कवि हैं जिन्होंने भाव और भाषा के साथ कविता को बेहद संजीदगी से पाला और पोषा है।

गीतकार हसरत जयपुरी: मैंने ख़ूबसूरत लड़कियों से कभी टिकट नहीं लिया

  • मोहम्मद अकरम, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गीतकार हुए जो अपने नायाब गीतों के ज़रिए आज भी लोगों के मन में ज़िंदा हैं। हसरत जयपुरी भी इन्हीं गीतकारों की फेहरिस्त में शामिल हैं।

येव्गेने येव्तुशेंको: मां नहीं चाहती थी मैं कवि बनूं... 

  • अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

शाहिद साहब, अदब को कौन-सा रोग लग गया है! 

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

और जब साहिर गया तो जाते-जाते अपने सौ रुपए भी लेता गया

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

शायद इसीलिए इब्ने इंशा बार-बार मीर को करते हैं याद...

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017

सरदार जाफरी: काव्य सौंदर्य की आभा और कबीर-मीर-ग़ालिब को निहारना

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017

उर्दू साहित्य में अली सरदार जाफ़री शायरी के साथ-साथ आलोचनात्मक निबंधों के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

शबाना आज़मी ने नहीं पढ़ी उर्दू तो 'फ़ैज़' ने कहा- नामाक़ूल हैं तुम्हारे मां-बाप

  • मोहम्‍मद अकरम, नई दिल्ली
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017

शेरो-शायरी को पसंद करने वाली अदाकारा शबाना आज़मी शायर फै़ज़ अहमद फ़ैज़ की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं।

ज़मींदार पिता चाहते थे कैफ़ी आज़मी मौलाना बनें पर...

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017

हिंदी फ़िल्मों की अदाकारा शबाना आज़मी के पिता कैफ़ी आज़मी साहब हिंदुस्तान की शायरी में एक दैदीप्यमान नक्षत्र की तरह चमकते रहे।

गुलज़ार को ऐसे याद करती हैं अमृता प्रीतम

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 17 जुलाई 2017

फ़िल्मों में संगीत जब तक है, संगीत में नौशाद तब तक रहेगा

  • अमर शर्मा / नई दिल्‍ली
  • गुरुवार, 13 जुलाई 2017

'मोहन राकेश तो उठकर चले गए, मुझे लगा मैं उठाईगीरों के बीच आ फंसा हूं'

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 12 जुलाई 2017

'फ़िराक़ बोले, लगता है कि मूंगफली बेचने वाले मुशायरे में आ गए'

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 12 जुलाई 2017
View More
पाठकों के द्वारा भेजे गए
अन्य
Top
Your Story has been saved!