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Guroor

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

गुरूर

Sunil Khare

20 कविताएं

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ख़ुद पर ग़ुरूर हो तो ये मालिक की रज़ा है, ख़ुद पर ग़ुरूर होना ही तो उसकी अदा है,
जब फ़र्क ही नहीं है ख़ुद में और ख़ुदा में, ख़ुद पर ग़ुरूर होने में जीने का मज़ा है।

- सुनील खरे 


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