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mere humdard , humnva

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

मेरे हमदर्द, हम नवा

Shashank Goswami

7 कविताएं

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जुदा जो हुआ तुझसे मैं
खोया हुआ हूँ खुद मे मैं
उलझन बढ़ी है दिल में कई
सोचूं मैं तुझको हरपल हर घड़ी, हर कहीं

आँखों में धड़के है तेरा चेहरा
यादों के हर रस्ते पर तेरा पहरा
मुझको समझो न समझो मेरा इश्क समझो
रंग चढ़ा मुझ पर इश्क का न छूटे है गहरा
सुनो न सुनो, सुनो ये दिल जो कह रहा 
कुछ तो तुम भी कहो न चुप रहो मेरे खुदा
ओह ...मेरे हमदर्द...हम नवा

यादें मुझसे तेरी ये कहने लगीं
खुले न लव ये आंखें बहने लगीं
होती है हरपल क्यूं महसूस तेरी कमी
क्यूं है तेरी यादों से गहरा रिश्ता मेरा
रंग चढ़ा मुझ पर इश्क़ का न छूटे है गहरा
सुनो न सुनो, सुनो ये जो दिल कह रहा
आँखों में धड़के है तेरा चेहरा
मुझको समझो न समझो मेरा इश्क़ समझो
ओह्ह... मेरे हमदर्द.... मेरे हमनवा।

- अनंत मुंतसिर

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