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Aankhon ke rone mai woh takteef kahan...........

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

आंखों के रोने में वो तकलीफ कहां

Shahneel Khan

49 कविताएं

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आंखों के रोने में वो तकलीफ कहां,
जो तकलीफ है, दिल के रोने में।

वो दर्द जख़्म में कहां,
जो दर्द है, दिलबर को खोने में।

दर्द से दिल का कोना-कोना भर गया है,
जिन्दा होते हुए भी ये दिल मर गया है।

दिल में ख़्वाहिश के लिए कोई जगह नहीं,
रूठा जो साथी बिन उसके जीने की वजह नहीं।

वो आराम बैठने में कहां,
जो मजा है सोने में। 

वो दर्द जख़्म में कहां,
जो दर्द है दिलबर को खोने में। 

दिल में अब इतनी कशिश है, बयां नहीं होती,
दिल पे ये कैसा कहर है? दिल तो रोता ये धड़कन भी रोती। 

बड़ी बे-करारी दिल के रू-ब-रू है |
हर लम्हा, हर पल दर्द-ए-दिल शुरू है ||

वो मशक्कत दिल तोड़ने में कहां,
जो मशक्कत है प्यार के बीज बोने में।

वो दर्द जख़्म में कहां,
जो दर्द है दिलबर को खोने में। 

- नूरहसन उर्फ शाहनील ख़ान 


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