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Flashback of Khuddar film song Oonche Neeche Raste

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

ऊंचे नीचे रास्ते और मंजिल तेरी दूर... साहस पैदा करता है 'ख़ुद्दार' का ये गीत

शरद मिश्र, नई दिल्ली

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1982 में रिलीज़ अमिताभ बच्चन और संजीव कुमार अभिनीत 'ख़ुद्दार' फ़िल्म के इस गीत में जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है। गीत के बोल मजरुह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं। राजेश रोशन ने इसे संगीत से सजाया है। लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने अपनी आवाज़ दी है।

फिल्म तीन भाईयों पर आधारित है। बड़ा भाई संजीव कुमार अपनी साइकिल पर दो छोटे भाइयों अमिताभ बच्चन और विनोद मेहरा को गांवों की पगडंडियों और तालाब-पोखरों के बीच से अलसुबह स्कूल छोड़ने जाता है तो रास्ते में इस गाने का फ़िल्मांकन होता है। सूरज के निकलने के समय और अन्य पशु-प‌क्षियों के चहचहाट के बीच दिन की शुरुआत के साथ यह गीत शुरू होता है। इसकी  शुरुआत बताती है कि जीवन सूरज की लालिमा के साथ शुरू होता है। गीत के बोल बड़े प्यारे हैं। किशोर कुमार की आवाज़ जैसे इस गीत में जान डाल देती है। 
 
ऊंचे नीचे रास्ते और मंजिल तेरी दूर 
राह में राही रुक ना जाना होकर के मजबूर 

ये हमारी ज़िन्दगी, एक लम्बा सफ़र ही तो है!
चलते हैं जिस पर हम, अनजानी डगर ही तो है!!
देख संभालना, बच के निकलना!
जो नहीं चलते देख कर आगे, वो करते हैं भूल...


ये बोल जीवन के सफ़र को व्यक्त करते हैं। इसमें जीवन पथ में संभलने की ताक़ीद की गई है। पथ को अनजान बताते हुए इसको शिद्दत के सा‌थ पूरा करने का जज़्बा इस गीत में समाहित हैं। गीत के बोल, 'ये हमारी ज़िंदगी एक लंबा सफ़र है, चलते हैं जिसमें हम एक अनजानी डगर है'। यह हमें प्रेरणा देता है ज़िंदगी की राह में हमेशा आगे जाने की, हमेशा मेहनत करते रहने की। 

गीत के बीच में यानी स्कूल के सफ़र में साइकिल पंचर हो जाती है जो जीवन की कठिनाइयों की ओर इशारा करती है। इस गीत में ऐसे बोल भी हैं जो हौंसले से इस बाधा को पार करने का साहस देते हैं। गीत के बोल में छोटा भाई संघर्ष को याद करके कहता है-

करूं क्या मैं प्यारे भाई, थक जाएं अगर मेरे पांव...?

तो बड़ा भाई साहस भरे शब्दों में छोटे भाई को जवाब देता है 

दम ले कर दो घड़ी , चला चल , वन मिले चाहें गांव !!
जो कोई सोया, उसने ही खोया !
बात हमारी याद हमेशा, रखना तुम जरूर...



गाने में यह भी बोल है-

तुझे प्यार भी मिले तो पथ में समझना यही !
ये है रास्ते की छांव , साथी तेरी मंजिल नहीं !!
तेरा तड़पना और है सपना !
अपने ही सपनों की मंजिल से , न रह जाना दूर ...


मतलब जीवन में एक बार लक्ष्य हासिल करके ही दम लो। गीत आपको बताता है कि भटकने के लिए बहुत से रास्ते जीवन पथ में मिलते हैं। पर व्यक्ति को हमेशा अपनी मंजिल पर नजर रखनी चाहिए तभी उसे विजेता कहा जाएगा। यह गीत हारे हुए लोगों के लिए एक तरह से संजीवनी है।  

जब यह फ़िल्म आई थी तब मैं महज़ आठ साल का था। मैं भी अपने बड़े भाई के साथ यह फ़िल्म देखने गया, फ़िल्म की शुरुआत में ही यह गाना होता है। इसी वजह से यह मेरे मन मस्तिष्क में बस सा गया। आज भी जब ज़िंदगी में कभी हार सा महसूस करता हूं तो यह गीत प्रेरणा देकर मुझमें शक्ति का संचार करता है।

संगीतकार राजेश रोशन का संगीत और किशोर कुमार की आवाज़ ने इसे जो संजीदगी दी है वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। गीत पूरी फ़िल्म का सूचक है। वह बताता है कि खुद्दारी में जीने में बहुत मजा है। जीवन की राह में मेहनत और ईमानदारी से जीते रहने में बहुत सुकून है। गीत में जो पंक्तियां है वह नायक अमिताभ बच्चन के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं। ऐसे गीत की बुनियाद पर ही खुद्दार जैसी फ़िल्म का सफ़ल निर्माण हो सकता था। 
 
लीजिए आप भी सुनिए इस प्रेरणास्पद गीत को। 

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