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Vyakaran Zindagi ka

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

व्याकरण ज़िन्दगी का...

Archana Archan

1 कविता

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ज़िन्दगी के शब्दकोश में
नहीं मिलते
कई जटिल शब्द

न व्याकरण का कोई नियम
लागू होता है
सांसों और सपनों पर

कुछ बेतरतीब सी है
वर्तनी, इच्छाओं की

मुश्किलों के हिस्से में
नहीं आता, कभी कोई अलंकार
न तो संज्ञा, न ही सर्वनाम का बोध
करा पाते हैं रिश्ते

प्रश्नवाचक चिन्ह हर इबारत पर
और समाधान…
बचपन में १९ के पहाड़े जितने कठिन

जोड़, घटाना, गुणा, भाग लगातार
पर नतीजा
हर बार एक बड़ा 'सिफर'

काश....
ज़िंदगी
'क ख ग' जितनी ही आसान होती


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

 
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