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a song which full of many emotion on love and their depth 
मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

'ज़िंदगी की न टूटे लड़ी...' मख़मली एहसास से जोड़ने की कोशिश है यह गीत  

  • शरद मिश्र, नई दिल्‍ली
  • बुधवार, 13 सितंबर 2017
ज़िंदगी की न टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी...

1981 में रिलीज़ फ़िल्म क्रांति का यह गीत ज़िंदगी की बिखरी कड़ियों को प्यार के मख़मली एहसास से जोड़ने का एक बेहतर ज़रिया हो सकता है। बारिश की घनघोर बूंदों के बीच जहाज़ पर अंग्रेज़ों की हथकड़ियों में बंधे दो प्रेमियों के बीच यह गीत फ़िल्माया गया है। प्रेम की तड़प और साहस को बख़ूबी बयां करने वाले इस गीत का फ़िल्मांकन बेहद ख़ास है। नितिन मुकेश और लता मंगेशकर ने हमेशा की तरह इस गीत में भी अपनी सुरमयी आवाज़ का जादू बिखेरा है।

गीत इतना मोहक है कि यह आदमी को एक पल प्यार के बारे में सोचने के लिए अवश्य उत्साहित करता है। इसी वजह से यह गीत मेरे दिल के बेहद क़रीब है। आज जीवन में बदलाव की बयार बह रही है। लोग आर्थिक उदारीकरण के इस आधुनिक युग में प्यार को नितांत अकेला छोड़ चुके हैं। आगे जाने की दौड़ में उन्हें प्यार को छोड़ने को कोई गुरेज़ भी नहीं है। लेकिन आधुनिक रहन-सहन के बीच आप कितना भी आलीशान जीवन अपने मेहनत से हासिल कर लें पर अकेले में कहीं न कहीं प्यार के दो बोल हर कोई गुनगुनाता है। यह गीत आदमी की व्याकुलता को बढ़ाते हुए अंत में जीवन के एकांतपन का परिचय देता है।

ऐसा लगता है कि इस गीत में प्रेम के अधूरे पलों को एक करने की सफ़ल कोशिश की गई है। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी का संगीत इस गीत को और मधुर बनाता है। संतोष आनंद का यह गीत एक तरह से प्रेम का समुंदर है। वैसे तो उनके हर गीत प्रेम की उच्च पराकाष्ठा हैं। लेकिन आनंद का यह गीत प्रेम का सर्वस्य समर्पण हैं। बेड़ियों में जकड़े मनोज कुमार और हेमा मालिनी पर फ़िल्माए इस गीत में प्रेम को मिलने वाले कष्ट, रंज और गम साफ़ झलकते हैं। इसके बाद भी प्रेमी हथकड़ी में ही अपने मिलन की ओर बढ़ते हैं। झनकार के साथ शुरू होने वाला यह गीत मन को सबसे पहले झंकृत करता है। बाद में प्रेम की ओर मन को ले जाता है।  


'ज़िंदगी की न टूटे लड़ी
प्यार कर ले घड़ी दो घड़ी
लम्बी लम्बी उमरिया को छोड़ो
प्यार की इक घड़ी है बड़ी'


ये पंक्तियां कहती है कि जीवन शौहरत की एक बहुत बड़ी मिसाल हो सकता है। आलीशान रहन-सहन, खान-पान, पहनावे, पैसों और ऊंची फ़ेहरिस्त की लंबी -लंबी उम्र हो सकती है लेकिन इसके बाद भी जीवन प्यार की एक घड़ी के लिए तरसता है। गीतकार कहता है कि लंबी उमरिया को छोड़ कर प्यार की इसी एक अनमोल घड़ी की ओर चल।  


'उन आखों का हंसना भी क्या
जिन आंखों में पानी न हो
वो जवानी जवानी नहीं
जिसकी कोई कहानी न हो
आंसू हैं ख़ुशी की लड़ी'


ये पंक्तियां साफ़ कहती है कि उन आंखों की हंसी असली नहीं हो सकती, जिन आंखों में आंसुओं का सैलाब न हो। मतलब जीवन में शर्त है कि अगर आंखों में प्यार होगा, आंखों में आंसू भरे होंगे तो एक दिन ज़रूर वह आंख हंसकर किसी पर ठहरने के लिए मचल जाएगी। गीतकार कहता है कि बिना आंसू के हंसी बेकार है, व्यर्थ है। फिर गीत में यह कहा गया है कि हर जवानी की एक कहानी होनी चाहिए। दौलत, मस्ती, पैसा, शोहरत, काम वासना, अपराध सभी में जवानी झलकती है, एक रोमांच और कहानी लिए फिरती है लेकिन गीतकार यह भी कहता है कि जवानी की ऐसी कहानी होनी चाहिए, जो प्यार पर मर मिटने के लिए आमादा हो। प्रेम के लिए जग छोड़ दे। जीवन सफ़ल कर दे। गीतकार कहता है आंसू दुख की नहीं ख़ुशी की लड़ी हैं। संतोष आनंद की ऐसी सकारात्मक सोच एक तरह से इन पंक्तियों में प्रेम को अभिभूत कर देती है।  

'आज से अपना वादा रहा
हम मिलेंगे हर एक मोड़ पर
दिल की दुनिया बसायेंगे हम
ग़म की दुनिया का डर छोड़ कर
जीने मरने की किसको पड़ी'


इन पंक्तियों में कहा गया है कि प्यार एक तरह से वादा होता है। वह करो तो यह ख़्याल रखो कि इस वादे को पूरा करने में काफ़ी मुश्किलात का सामना करना पड़ेगा। वह कहता है कि दूसरे से वादा करने के अलावा ख़ुद से भी वादा करो और शुरू हो जाओ उस वादे को या प्रेम को पूरा करने में, एक तरह से जुट जाओ। गीत आगे कहता है कि रंग बदलती इस दुनिया से अलग एक दिल की दुनिया बसाओ, जहां सिर्फ़ सच्चाई हो, प्रेम हो, प्यार हो, समर्पण हो। अहं से दूर लफ़्ज़ों का ऐसा गहरा एहसास हो, जहां हर जगह सुहावनी तस्वीर नज़र आए।   

'लाख गहरा हो सागर तो क्या
प्यार से कुछ भी गहरा नहीं
दिल की दीवानी हर मौज पर
आसमानों का पहरा न हो
टूट जायेगी हर हथकड़ी'


अंत की पंक्तियां पूरे गीत का सार हैं। इसमें कहा गया है कि प्यार सबसे गहरा होता है। इसकी गहराई का कोई मापदंड नहीं होता है। किसी के दिल के अरमानों का पता लगाना दुनिया का सबसे कठिन काम है। सागर की गहराई को भी गीतकार इसके आगे छोटा मान लेता है। वह कहता है कि दिल की दीवानगी बहुत शक्तिशाली होती है। आसमान भी उस पर पहरा नहीं दे सकते। जब वह अपने पूरे रौ में होती है तो उससे हर कोई हार जाता है। कहा भी गया है सच्चा प्यार सबको झुका देता है। जात-पात, धर्म-समाज, अमीरी-गरीबी सभी को परास्त कर देता है। पर ऐसा तभी होगा जब मन में दो जीवों के मन में एक दूसरे के प्रति सच्चा प्यार हो। तभी उन भावनाओं को परवाज़ मिलेगी। एक अकेला इस राह में सिर्फ़ भटकेगा। यह सफ़र दो लोगों से ही पूरा होगा।
 
लीजिए यहां सुनिए इस प्यार भरे गीत को-


 
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