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बताएं किसी ऐसी फिल्मी गीत के बारे में जिसके बोल आपके दिल में बसते हैं

कस्मे वादे प्यार वफ़ा सब बाते हैं बातों का क्या...

  • विजय कुमार, नई दिल्‍ली
  • मंगलवार, 15 अगस्त 2017

1967 में रिलीज फिल्म उपकार ने फिल्म कलाकार मनोज कुमार को भारत कुमार की संज्ञा दिलाई थी। लोकप्रिय फिल्म में एक से एक बेहतरीन गीत थे। सभी ने बॉलीवुड ने धूम मचाई थी।

'हम बहनों के लिए मेरे भैया...' भाई-बहन के रिश्ते में फ़ासले बेमाने होते हैं

  • देव कश्यप, नई दिल्ली
  • सोमवार, 7 अगस्त 2017

हर इंसान के जीवन में रिश्तों की बड़ी अहमीयत होती है। हम जन्म के साथ ही कई रिश्तों में बंध जाते हैं। इन रिश्तों में जो सबसे प्यारा होता है उनमें से भाई-बहन का रिश्ता है।

सर से पांव तक झुरझरी पैदा करने वाला नग़मा

  • रविवार, 6 अगस्त 2017

न तड़पने की इज़ाज़त है ना फ़रियाद की है, घुट के मर जाऊँ ये मर्ज़ी मेरी सय्याद की है। कुछ ऐसे गाने होते हैं जिन्हें न केवल सुनना अच्छा लगता है बल्कि ऐसा लगता है कि बस वो हमारी बात ही कह रहे हैं।

दोस्ती स्पेशल: 'तेरे जैसा यार कहां' यक़ीन और हमदर्दी महज़ ये अल्फ़ाज़ नहीं...

  • मोहम्मद अकरम/ अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 6 अगस्त 2017

'आज मौसम बड़ा बेईमान है...' मौसम को देख इश्क़ मचल उठता है

  • मोहम्‍मद अकरम / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 2 अगस्त 2017

'...आंखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं' सुकून के साहिल पर ले जाएगा यह गीत

  • मोहम्‍मद अकरम / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 1 अगस्त 2017

आप की आंखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं, आपसे भी खूबसूरत आपके अंदाज़ हैं। 'घर' फ़िल्म का यह नग़्मा वक़्त-बेवक़्त मैं जब भी सुनता हूं....

'चुपके चुपके रात दिन...' अधूरी मोहब्बत की बेशक़ीमती ग़ज़ल

  • मोहम्‍मद अकरम / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शनिवार, 29 जुलाई 2017

दुनिया में दो ग़म ऐसे हैं जिनके मर्ज़ की दवा की तलाश में इंसान जिंदगी भर उलझन में रहता है। पहला है ग़मे रोज़गार औऱ दूसरा ग़मे मोहब्बत। पहले ग़म का देर सवेर ही सही लेकिन हल निकल आता है, मगर दूसरा है कि ग़में मोहब्बत ता-ज़िंदगी सालता है।

मैं ज़िंदगी का साथ...ग़म-ख़ुशी के बीच जीवन के मायने 

  • आनंद कश्यप, नई दिल्ली
  • शनिवार, 29 जुलाई 2017

जिंदगी का साथ कैसा होता..?? कैसी होती है जिंदगी..??  इस पर हम सभी की अपनी-अपनी अगल राय हो सकती है, क्योंकि हम सभी के लिए जिंदगी के अलग-अलग मायने हैं।

एक अजनबी हसीना से यूं मुुलाक़ात हो गई...

  • मोहम्‍मद अकरम / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

'या दिल की सुनो दुनियावालों'...टूटे दिल की मख़मली आह

  • आसिफ इकबाल, नई दिल्ली
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017

तुझसे नाराज़ नहीं...जीवन को समझने की कोशिश 

  • पूजा मेहरोत्रा, नई दिल्‍ली
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017

अजनबी कौन हो तुम...इश्क़ की पहचान कराता यह गीत

  • शरद मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017
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