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Looking for happiness

मेरे अल्फाज़

हमारे पाठक योगेन्द्र सिंह सोलंकी को है, 'ख़ुशी की तलाश'

YOgendra SinGh

2 कविताएं

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एक विदित अप्राप्य आस में हूँ,
यारों मैं ख़ुशी की तलाश में हूँ |

यूँ तो हूँ मैं जानता सच को बहुत करीब से,
कि इस डगर में लग रहें हैं, सब मुझे गरीब से,
पर फिर भी मैं असाध्य उस लक्ष्य के प्रयास में हूँ |
यारें मैं खुशी की तलाश में हूँ,
यारों मैं खुशी की तलाश में हूँ |

होंठों पे है, झूठी हँसी,
कहने को है, सारी खुशी,
हैं लोग भी, कितने मगर,
न मैं किसी के पास हूँ |
यारों मैं खुशी की तलाश में हूँ,
यारों मैं खुशी की तलाश में हूँ |

नित्य कर्म भी करता हूँ मैं,
जग में सफल रहता हूँ मैं
पर असफलों से भी कहीं
ज्यादा मैं क्यों निराश हूँ
यारों मैं खुशी की तलाश में हूँ,
यारों मैं खुशी की तलाश में हूँ

- योगेन्द्र सिंह सोलंकी

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