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Gazzel

मेरे अल्फाज़

गजल हो जाइए

Vandaana Goyal

3 कविताएं

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आप श्वासों में मेरे ढल कर ग़ज़ल हो जाइए
रास्तों पर साथ यूँ चल कर ग़ज़ल हो जाइए

क्या बताऊंगा बता खुद को हकीकत रात दिन
बूंद हो गर सीप में पल कर ग़ज़ल हो जाइए

इत्र ही पहचान है गर रूह की शामों सहर
खुशबुओं को जिस्म में मल कर ग़ज़ल हो जाइए

कर सके फिर कोई तेरे वस्ल में यूं ना खलल
ख्वाब रातों के सभी छल कर गजल हो जाइए

जज़्ब होना है लकीरों में अगर मेरी तुम्हें
हाथ में फिर बर्फ सा गल कर ग़ज़ल हो जाइए

रोशनी हर शू अगर चाहिए, तो वंदना
बज्म में इक शम्म सा जल कर ग़ज़ल हो जाइए।

- वंदना मोदी गोयल


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