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The Final Destination

मेरे अल्फाज़

आखिरी पडा़व

Thakur S

17 कविताएं

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यूं न हो कि फासले कुछ दरमियां रह जाएं फिर,
यादें,आहें,आंसू,तड़प और सिसकियां रह जाएं फिर,
मन की मन से कह भी दो आंसू बरस क्यूं न पड़ें,
इस दफा न वो पुरानी बदलियां रह जाएं फिर ।

है यकीं मुझको न बिछड़ें अब जो ग़र हम मिल गए,
साए तेरे हर शाम हो ये फूल जो अब खिल गए,
तुझपे भरोसा मुझको है,तेरी इबादत मैं करूं,
साथ रहना इस तरह न हिचकियाँ रह जाएँ फिर।।

यादें,आंहे,आंसू,तड़प और सिसकियां रह जाएं फिर,
यूं न हो कि फासले कुछ दरमियां रह जाएं फिर।।
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