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मेरे अल्फाज़

लक्ष्य

Thakur S

16 कविताएं

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मार्ग वही अत्युत्तम जिसमें संघर्षों की बिगुल बजे,
उन जीतों का अर्थ नहीं पुष्पों से जिनकी राह सजे,

शूलों पर जो चलना सीखे
गर्तों में अब क्या गिरेंगे वो।

पीड़ा से प्रतिदिन करे स्वयंवर
कोदंडों से क्या डरेंगे वो।

लक्ष्य दिखे जब दूर गगन फिर कब नयनों में धूल रजे,
उन जीतों का अर्थ नहीं पुष्पों से जिनकी राह सजे।

- समीक्षा ठाकुर 


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