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Silent Love

मेरे अल्फाज़

मेरा मन प्यासा

Thakur S

17 कविताएं

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उसके दो नयन कभी पढ़ ना सके
मेरे मूक प्रेम की परिभाषा,

रह गया तभी तो आज तलक
मेरा मन प्यासा का प्यासा ।।

मेरा मान हो तुम,
मेरा ग्यान हो तुम,
मेरे जीवन का,
अभिमान हो तुम।।

है बढ़ जाती मिलकर तुमसे
तुमको पाने की अभिलाषा...

रह गया तभी तो आज तलक
मेरा मन प्यासा का प्यासा ।।

मेरे रोम-रोम का
रक्त हो तुम,
इक क्षण भी अब
ना विभक्त हो तुम,

मेरे पल-प्रतिपल के ईश बनो
इससे ना परे कोई आशा...

रह गया तभी तो आज तलक
मेरा मन प्यासा का प्यासा ।।

ना रोध हो तुम,
ना अवरोध हो तुम,
मेरे कण-कण का
प्रतिरोध हो तुम,

प्रेम तुम्हारा पाकर के,
बढ़ती जीवन की प्रत्याशा ...

रह गया तभी तो आज तलक
मेरा मन प्यासा का प्यासा।।

- समीक्षा ठाकुर

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