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Last Step

मेरे अल्फाज़

आखिरी पड़ाव

Thakur S

17 कविताएं

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इक कदम मेरे गर साथ चलो तो मंजिल को पा लेंगे हम,
इन उलझे-बिखरे सुरों से भी संगीत बना गा लेंगे हम,
थक के न अभी तुम यूँ बैठो,मेरा हाथ तुम्हारे हाथ में है,
कोशिश तो ज़रा इक बार करो,कोई तो हल पा लेंगे हम।

इन उलझे-बिखरे...

ग़र टूट गयी हैं मालाएँ और रूठ गयी हैं आशाएँ,
गर कोशिश हिम्मत हार गयी और छूट गयी हैं सीमाएँ,
इक बार प्रतिज्ञा ले कर के अर्जुन सा कदम बढ़ाओ तो,
फिर देखो इस रणभूमि में सूरज सा बन छा लेंगे हम ।।

इन उलझे-बिखरे ...

छिपें ना अपने रण में हम,डिगें ना अपने प्र प्रण से हम,
डरें ना आँधी-पानी से,और तूफानों में झुकें न हम,
हम हैं फौलादी जज़्बों के,क्या पीड़ाओं से टूटेंगे,
पायेंगे अपनी मेहनत का और किसी का हक़ नहीं लेंगे हम।।।
 
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