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Direction of life

मेरे अल्फाज़

'दिशा' जीवन की

Thakur S

17 कविताएं

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उलझी जीवन की राहें हैं, हो सके अगर सुलझा दो तुम,
बस मुझे दिशा मिल जाएगी, स्नेह का दीप जला दो तुम।।

तुम दूर भले कितने भी हो,
एहसास तुम्हारा हर पल है,
इन बीहड़ सूनी राहों में,
आभास तुम्हारा हर पल है,
पथ-कंटक स्वयं छिटक जाएं, ऐसा विश्वास जगा दो तुम,
बस मुझे दिशा मिल जाएगी, स्नेह का दीप जला दो तुम।।

हैं निर्मोही आयाम यहाँ,
जज्बात सभी के सस्ते हैं,
सूना जीवन मेरे प्रांगण का,
बस हालातों के रस्ते हैं,
चहुँ दिशाएं महक उठे, कुछ ऐसे सुमन खिला दो तुम,
बस मुझे दिशा मिल जाएगी, स्नेह का दीप जला दो तुम।।

हर राह घना अंधियारा है,
हूँ ज्योति-पुँज से बहुत दूर,
बन कर आलोक मेरे मन का,
बरसा दो इसमें अनन्त नूर
हर नीरवता मिट जाएगी, संग मेरे कदम बढ़ा दो तुम,
बस मुझे दिशा मिल जाएगी, स्नेह का दीप जला दो तुम।।

-समीक्षा ठाकुर

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