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Deep Love

मेरे अल्फाज़

मूक प्रेम

Thakur S

17 कविताएं

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उसके दो नयन कभी पढ़़ ना सके
मेरे मूक प्रेम की परिभाषा
रह गया तभी तो आज तलक
मेरा मन प्यासा का प्यासा

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