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India's future.

मेरे अल्फाज़

भारत का भविष्य

Suraj Sharma

5 कविताएं

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रात की खामोशी में वो सिसकियाँ ले रहा था,
भारत का भविष्य चौराहे पे कूड़ा बीन रह था।
मैं भी उस राह से गुजरा था,
जहां उसने अपना डेरा बनाया था।
मैं गाड़ी से नहीं उतरा,
क्योंकि ये गंदे लोग हैं मम्मी पापा ने ऐसा बताया था।
वो भी बच्चा दिखाने में अच्छा था,
मगर अफ़सोस मेरे पास मॉल के कपड़े उसके पास फटा कच्छा था।
फिर एक रोज वो मुझे सिग्नल पे भी मिला था,
हाथ मे एक कटोरा लिए खड़ा था।
उस रोज उसने शायद खुद को बेच दिया था,
मैंने देखा मेरी उम्र का लड़का सबके पाँव पड़ा था।
रात की खामोशी मे वो सिसकियाँ ले रहा था,
भारत का भविष्य चौराहे पे कूड़ा बीन रहा। था।
लोग खाते कम और फेकते ज्यादा है,
मुझे नही पता क्या मगर लग रहा था,
ये अमीरो की पहचान है।
दुर्भाग्य से आज फिर मुझे भारत का वो भविष्य दिख गया।
जो दूर खड़ा कुत्तों की झुण्ड में रोटी का इंतज़ार कर रहा था।
ये पार्टी मेरे पापा के एक दोस्त की थी,
जिनकी नेता गिरी में काफी बड़ी हस्ती थी।
कल उन्होंने भाषण भी दिया था।
भारत का कोई बेटा बेटी भूखा नही सोएगा ये वादा भी किया था।
आज उन्हीं की पार्टी में कूड़े की एक रोटी के लिए उनके गार्डों ने उस लड़के को बहुत पीटा था।
रात की खामोशी मे वो सिसकियाँ ले रहा था,
भारत का भविष्य चौराहे पे कूड़ा बीन रहा। था।

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